ना चली गोली, ना फटा बम फिर भी इंडोनेशिया के चुनाव में 300 लोगों की मौत, जानें हैरानी भरी वजह

इंडोनेशिया के चुनाव में 300 लोगों की मौत ने सनसनी फैला दी है. आप भी जब उनकी मौत का रहस्य जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे.

आजकल भारत में केंद्र और राज्य के चुनाव एक साथ कराए जाने पर जमकर विमर्श चल रहा है लेकिन इंडोनेशिया ने ऐसा कर दिखाया. उसने ऐसा किया खबर ये नहीं, बल्कि खास बात ये है कि ऐसा करने में उसके तीन सौ लोगों की मौत हो गई.

इस अजीबोगरीब खबर ने सभी को हैरान कर दिया है. दरअसल इंडोनेशिया में चार तरह के चुनाव एक साथ करा दिए गए. एक ही दिन में लोगों को केंद्र सरकार भी चुननी थी, राज्य की सरकार भी चुननी थी, शहर के लिए नगर पालिका भी और देश के लिए राष्ट्रपति भी.

इंडोनेशिया के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा था. दरअसल 17 हजार से भी ज़्यादा छोटे- बड़े द्वीपों वाले इस देश में ऐसा कराना दुष्कर था. तमाम जगहों पर मतपेटियों को पहुंचाना, सुरक्षा करना और फिर गिनना आसान नहीं था. खैर, जैसे-तैसे 17 अप्रैल को चुनाव करा लिया गया जिसका नतीजा 22 मई को आना है. अब दो हफ्तों के बाद एक भयावह आंकड़ा सामने आया कि अब तक 287 मतदान अधिकारियों और 18 पुलिसकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं. चुनाव आयोग ने ही बताया कि मारे गए लोगों के अलावा दो हज़ार से ज़्यादा लोगों के बीमार होने की जानकारी मिली है. उन्होंने ही खुलासा किया कि इतनी बड़ी तादाद में लोगों की सेहत गिरने के पीछे थकावट है. इससे पहले साल 2014 के चुनाव में भी डेढ़ सौ लोगों की जान गई थी. हां तब दो चुनावों में तीन महीनों का अंतर रखा गया था लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. उद्देश्य था कि पैसा तो बचे ही, साथ ही समय भी बच जाए.

आपको बताएं कि इंडोनेशिया में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता. वहां अभी भी पर्चियां हाथ से गिननी पड़ती हैं. चार चुनाव हुए इसलिए हर मतदानकर्मी एक बार में चार पर्ची गिन रहा था. चुनाव कराते हुए चुनाव आयोग को अंदेशा नहीं था कि ऐसा कराना लोगों की जान पर भारी पड़ेगा.

इंडोनेशिया के हालिया चुनाव में 19 करोड़ से अधिक मतदाता थे जिनमें 81%  ने वोटिंग अधिकार का इस्तेमाल किया. पूरी चुनावी प्रक्रिया 70 लाख लोगों ने मिलकर संपन्न की. 8 लाख मतदान केंद्रों पर मत पड़े. अब जब इन जटिल चुनावों का नतीजा लोगों की मौत के रूप में सामने आया है तो हंगामा मच गया है. गिनती का काम महीने भर तक चलना बाकी है, ऐसे में लोगों की जान बचाते हुए कैसे इसे पूरा किया जाएगा अब ये पूरे इंडोनेशिया की सबसे बड़ी चुनौती है.