कश्मीर में पाक ही फैलाता है आतंक, यकीन नहीं है तो देखिये लीजिये आसिफ गफूर का ये ट्वीट

पाक सेना के इस अधिकारी ने हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की बरसी पर किया उसे सलाम. 8 जुलाई 2016 को सुरक्षा बलों के साथ हुई गोलीबारी में ढेर हो गया था पोस्टर ब्वॉय वानी.

नई दिल्ली: घाटी में आतंकवाद को बढ़ाने और वहां के युवाओं को बहकाने पर एक बार फिर पाकिस्तान बेनकाब हो गया है. हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की बरसी पर पाकिस्तानी सेना का एक ऐसा बयान आया है, जिससे ये साफ़ जाहिर हो रहा है कि वहां के बिगड़े माहौल के पीछे सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान ही है.

पाकिस्तान की मीडिया विंग इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक आसिफ गफूर ने हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की बरसी पर उसे सलाम किया है. गफूर ने ट्वीट कर वानी के त्याग को महान बताते हुए कहा कि बिना बलिदान के कुछ भी हासिल नहीं हो सकता. आने वाले कल को बेहतर बनाने के लिए जिन लोगों ने त्याग किया है उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता.

आज से ठीक तीन साल पहले यानी 8 जुलाई 2016 को अनंतनाग जिले के कोकेरनाग इलाके में सुरक्षा बलों के साथ हुई गोलीबारी में वानी मारा गया था. वानी की मौत के बाद कश्मीर में अशांति फैल गई जो चार महीने तक चली थी. अनियंत्रित भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को आग के हवाले कर दिया था. भीड़ और सुरक्षाबलों की झड़प में 98 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी. रिपोर्टों के मुताबिक़ इस दौरान चार हजार से ज्यादा लोग पैलेट गन से घायल होने के कारण स्थायी रूप से या आंशिक रूप से अंधे हो गए थे.

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अमरनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों के जत्थे रोके
बुरहान वानी की बरसी पर अलगाववादियों की तरफ से बुलाये गए विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए सोमवार को श्रीनगर शहर के कई हिस्सों और घाटी के अन्य स्थानों पर प्रतिबंध लागू किए गए हैं. न केवल दुकानें, व्यवसाय और परिवहन बंद हैं बल्कि इंटरनेट सेवाएं भी रोक दी गई हैं. यहां तक कि वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के जत्थे को भी रवाना होने से रोक दिया गया.

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यहां लगा प्रतिबंध
अलगाववादी समूह सईद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासीन मलिक की अगुवाई वाले ज्वाइंट रेजिस्टेन्स लीडरशीप (जेआरएल) ने लोगों से अपील की है कि वानी की तीसरी बरसी पर घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करें और आहूत बंद का समर्थन करें. पुलिस सूत्रों ने बताया कि नौहट्टा, खानयार, रैनावारी, एम.आर. गंज और सफाकदल आदि इलाकों में प्रतिबंध लगाए गए हैं.