resolutions on CAA presented in European Parliament, CAA पर यूरोपीय संसद में पेश हुए 6 प्रस्ताव, भारत-EU संबंधों पर पड़ेगा असर
resolutions on CAA presented in European Parliament, CAA पर यूरोपीय संसद में पेश हुए 6 प्रस्ताव, भारत-EU संबंधों पर पड़ेगा असर

CAA पर यूरोपीय संसद में पेश हुए 6 प्रस्ताव, भारत-EU संबंधों पर पड़ेगा असर

यूरोपीय संसद में यह मामला ऐसे समय पर उठाया जा रहा है, जब भारतीय प्रधान मंत्री का 13 मार्च को भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के लिए ब्रुसेल्स का दौरा प्रस्तावित है.
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यूरोपियन संसद में भारतीय नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से संबंधित छह प्रस्ताव पेश किए गए हैं. यह छह प्रस्ताव CAA पर यूरोपियन संसद में बहस के लिए पेश किए गए हैं, जो कि 29 जनवरी को होगी. इसके बाद 30 जनवरी को मामले में वोटिंग की जाएगी. इन प्रस्तावों का असर भारत और यूरोपियन देशों के संबंधों पर भी पड़ेगा.

ज्यादातर प्रस्तावों में CAA का गंभीर रूप से विरोध किया गया है, जबकि कुछ में, असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू किए जाने और जम्मू कश्मीर में लगे प्रतिबंधों की भी आलोचना की गई है. सबसे महत्वपूर्ण है एस एंड डी ग्रुप द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव.

एस एंड डी ग्रुप संसद में दूसरा सबसे बड़ा ग्रुप है, जिसके पास 154 MEP (मेंबर्स ऑफ यूरोपियन पार्लियामेंट) हैं. एस एंड डी के मुताबिक CAA में दुनिया में सबसे बड़ा राज्यविहीन लोगों का संकट पैदा करने की क्षमता है. EPP ग्रुप सबसे बड़ा ग्रुप है, जिसके पास 182 MEP है. इस ग्रुप द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के मुताबिक इस कानून के “भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और आंतरिक स्थिरता” के लिए नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं.

जिन अलग-अलग ग्रुप्स ने प्रस्ताव पेश किए हैं, वो अब परदे के पीछे से 29 जनवरी को किए जाने वाले समझौते ती तैयारी में जुटे हैं. हालांकि यहां बता दें कि अगर बहस के बाद प्रस्ताव पारित भी हो जाएं, तो भी वह यूरोपीय आयोग के लिए बाध्यकारी नहीं होंगे. हालांकि ऐसे में वह भारत सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं. यह दवाब ऐसे समय में बढ़ाया जाएगा, जब भारत पहले से ही पश्चिमी देशों की मजबूत आलोचना से जूझ रहा है.

आलोचना करने वाले देशों में यूरोपीय संघ (EU) का प्रमुख सदस्य जर्मनी भी शामिल है. जो कश्मीर में स्थिति से निपटने, नागरिकता कानून और असम में एनआरसी लागू किए जाने को लेकर आलोचना कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि MEPs इन मुद्दों को उठाने के लिए अपने घरेलू देशों में राजनेताओं की पैरवी कर सकते हैं.

यूरोपीय संसद में यह मामला ऐसे समय पर उठाया जा रहा है, जब भारतीय प्रधान मंत्री का 13 मार्च को भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के लिए ब्रुसेल्स का दौरा प्रस्तावित है. MEP के एक ग्रुप ने अपने प्रस्ताव में सुझाव दिया है कि CAA का मुद्दा मोदी की यूरोपीय यात्रा के दौरान उठाया जाना चाहिए. EU ने पहले ही कश्मीर की स्थिति और यूरोपीय संघ के देशों के दूतों द्वारा इस क्षेत्र की यात्रा के बारे में चिंता व्यक्त की है, फिलहाल यूरोपीय संघ के मिशन द्वारा नई दिल्ली और विदेश मंत्रालय द्वारा चर्चा की जा रही है.

ये भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में अप्रैल से शुरू होगा RSS का पहला सैनिक स्कूल

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