75 साल बाद भी हिरोशिमा-नागासाकी में खौफनाक असर, पढ़ें- क्या कहते हैं परमाणु हमले के सर्वाइवर्स

आज दुनियाभर में हथियारों की होड़ मची हुई है. हर एक देश खतरनाक से खतरनाक हथियार बनाने में लगा हुआ है. अनुमान है कि मानवता के विनाश की वजह ये हथियार ही होंगे.

दुनिया में हुए पहले परमाणु हमले (First Nuclear Attack) की आज यानी गुरुवार को 75वीं वर्षगांठ है. यह वही दिन है जब 6 अगस्त, 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान अमेरिका (America) ने जापान (Japan) के हिरोशिमा (Hiroshima) पर परमाणु हमला किया था. इसके तीन दिन बात यानि 9 अगस्त, 1945 में अमेरिका ने जापान के ही नागासाकी (Nagasaki) शहर पर दूसरा परमाणु हमला किया.

लाखों लोग मारे गए, एक बड़ी आबादी बेघर हुई

इस हमले में लाखों लोग मारे गए, एक बड़ी आबादी बेघर हुई. इतना ही नहीं परमाणु हमले के 75 साल बाद भी रेडिएशन का असर आज भी यहां के लोगों पर है. जो इन परमाणु हमलों के गवाह बने लोग अब बूढ़े हो चले हैं. ये लोग सालों से दुनिया को परमाणु हथियारों के आतंक की याद दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

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द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, कीको ओगुरा उस समय 8 साल की थीं, जब हिरोशिमा पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराया. आगुरो सर्वाइवर्स में से एक हैं. वो अपने घर के बाहर खेल रही थीं. विस्फोट इतना तगड़ा था कि बम गिरने की जगह से काफी दूर मौजूद ओगुरा बेहोश होकर गिर गई थीं.

दुनिया को बिना परमाणु हथियारों के देखने की उम्मीद

अब ओगुरा दुनिया को बिना परमाणु हथियारों के देखने की उम्मीद बांधे हुए हैं. ओगुरा की ही तरह कई लोग हैं जो कि नागासाकी और हिरोशिमा हमलों में बच गए. अब ये लोग इसी उम्मीद में हैं और संघर्ष कर रहे हैं कि वे एक दिन दुनिया को बिना परमाणु हथियार के देख सकेंगे. कई लोग इसके लिए अपनी आखिरी सांस तक लड़ने को तैयार हैं.

आज दुनियाभर में हथियारों की होड़ मची हुई है. हर एक देश खतरनाक से खतरनाक हथियार बनाने में लगा हुआ है. अनुमान है कि मानवता के विनाश की वजह ये हथियार ही होंगे. विनाश का एक भयावह नजारा हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु हमले के रूप में देखा जा चुका है. इसके अलावा भी निरंतर कई छोटे-बड़े हमले दुनिया के किसी न किसी हिस्से पर होते रहे हैं.

6 और 9 अगस्त का वो खौफनाक दिन

6 अगस्त, 1945 की सुबह 8:15 बजे, US B-29 वॉरप्लेन एनोला गे ने “लिटिल बॉय” नाम का बम गिराया और दक्षिण-पश्चिम शहर हिरोशिमा को तबाह कर दिया. बम हिरोशिमा के तय जगह पर नहीं गिराया जा सका था. यह हिरोशिमा के आइयो ब्रिज के पास गिराया जाना था, लेकिन उल्टी दिशा में बह रही हवा के कारण यह अपने लक्ष्य से हटकर शीमा सर्जिकल क्लिनिक पर जा गिरा.

इस हमले के कारण 3,50,000 की अनुमानित आबादी में से 1,40,000 लोग मारे गए. हजारों की गंभीर चोट के कारण बाद में मृत्यु हो गई और कई रेडिएशन से जुड़ी बीमारी से ग्रस्त हो गए.

इसके बाद 9 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने नागासाकी के दक्षिण में लगभग 420 किलोमीटर (261 मील) की दूरी पर “फैट मैन” नामक एक और बम गिराया. इस परमाणु बम ने नीचे गिरते ही तुरंत 75,000 से अधिक लोगों को मार डाला. इसके छह दिन बाद जापान ने सरेंडर कर दिया और द्वितीय विश्व युद्ध खत्म हो गया.

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