उइगर के बाद अब उत्सुल मुस्लिमों को टारगेट कर रहा चीन, हिजाब पर लगाया बैन

हैनान के द्वीप प्रांत के सान्या शहर में केवल 10 हजार की आबादी वाले इस छोटे से उत्सुल मुस्लिम समुदाय को स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में अपने पारंपरिक कपड़े पहनने को लेकर टारगेट किया जा रहा है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 8:50 pm, Mon, 28 September 20
पुलिस के सामने प्रदर्शन करती उत्सुल समुदाय की लड़कियां (Twitter)

चीन (China) में उइगर मुस्लिम (Uyghur Muslims) अल्पसंख्यकों की हालत का सच किसी से नहीं छिपा है. इसी तरह अब हैनान द्वीप के जातीय अल्पसंख्यक उत्सुल (Utsul Muslims) समुदाय के लोगों को भी निगरानी और धार्मिक रोकटोक का सामना करना पड़ रहा है. चीन कम्युनिस्ट सरकार उइगर मुस्लिमों की तरह ही इन पर धार्मिक प्रतिबंध लगा रही है और जिसका अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध हो रहा है.

हैनान के द्वीप प्रांत के सान्या शहर में केवल 10 हजार की आबादी वाले इस छोटे से उत्सुल मुस्लिम समुदाय को स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में अपने पारंपरिक कपड़े पहनने को लेकर टारगेट किया जा रहा है और अधिकारियों ने उस पर प्रतिबंध भी लगा दिया है.

उत्सुल समुदाय के एक वर्कर ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बात करते हुए कहा, “आधिकारियों का साफ कहना है कि कोई भी जातीय अल्पसंख्यक स्कूल के मैदान में पारंपरिक कपड़े नहीं पहन सकता है, लेकिन अन्य जातीय अल्पसंख्यक भी सान्या में अपने दैनिक जीवन में पारंपरिक वस्त्र नहीं पहनते हैं. इसलिए इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन हमारे लिए हिजाब एक अभिन्न अंग है. हमारी संस्कृति का एक हिस्सा, अगर हम इसे उतार देते हैं, तो यह हमारे कपड़े उतारने जैसा है.”

विरोध में लड़कियों ने हेडस्कॉव पहन कर की पढ़ाई

हिजाब पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के खिलाफ वहां विरोध प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें लड़कियों का एक ग्रुप तियान्या उत्सुल प्राइमरी स्कूल के बाहर हेडस्कॉव पहनकर किताबें पढ़ रही थीं और पुलिस ने उन्हें चारो तरफ से घेरा हुआ था. हिजाब के अलावा उत्सुल महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक लंबे स्कर्ट पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था.

मालूम हो कि उत्सुल मुस्लिम, चामिक बोलने वाले पूर्व एशियाई जातीय समूह चीन में गैर-मान्यता प्राप्त जातीय समूह हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि लगभग एक करोड़ उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों पूरे चीन में नजरबंदी कैंप में रखा जा रहा है.

2015 के कानून का सहारा लेकर लगाया जा रहा प्रतिबंध

वहीं चीन सरकार ने बार-बार आतंकवादी हमलों का आरोप लगाकर उइगरों के साथ किए जा रहे व्यवहार को सही ठहराया है. इसी तरह 2015 में शिनजियांग घूंघट और “किसी भी अन्य कपड़े जो चरमपंथी धार्मिक विचार को बढ़ावा देते हैं” उनपर प्रतिबंध लगाने वाले कानून का सहारा लेकर अब उत्सुल के लिए हिजाब पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है.

रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले एक साल में चीन के ऐसे इलाकों में जहां, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं, वहीं सरकार ने इस तरह के कड़े कानूनों को लागू किया है. इसमें मस्जिदों के आकार में छोटा करना, उनके अरब डिजाइन पर रोक लगाना, स्टोरफ्रंट से अरबी लिपियों को हटाना शामिल है.

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि मस्जिदों के पास अब एक कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य होना चाहिए, जो मस्जिदों और उनमें आने वाले लोगों पर निगरानी करेगा.

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