VIDEO: इमरान खान से पहले ट्रंप के पास पहुंचा अहमदिया मुसलमान, यूं खोली पाकिस्तान की पोल

अब्दुल ने बताया, "साल 1974 में पाकिस्तान ने हमें (अहमदियों) को गैर-मुसलमान घोषित कर दिया था. हमारी दुकानें और घरों को लूटा गया और कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया."
अहमदिया, VIDEO: इमरान खान से पहले ट्रंप के पास पहुंचा अहमदिया मुसलमान, यूं खोली पाकिस्तान की पोल

वॉशिंगटन: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सत्ता में आने के बाद पहली बार अमेरिका के दौरे पर गए हैं. हालांकि उनका ये दौरा काफी विवादों में रहा है. पहले तो उन्हें लेने के लिए कोई अमेरिकी अधिकारी एयरपोर्ट नहीं पहुंचा. तो दूसरा एक पाकिस्तानी अहमदिया मुसलमान इमरान की शिकायत लेकर डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंच गया और इस मुलाकात का वीडियो ट्रंप और इमरान की मुलाकात के ठीक पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

दरअसल पाकिस्तान के अहमदिया मुसलमान समुदाय के अब्दुल शकूर, इमरान से पहले ट्रंप के पास पहुंच गए और उनके साथ पाकिस्तान में होने वाले व्यवहार से ट्रंप को अवगत कराया. 83 वर्षीय शकूर हाल ही में पाकिस्तान की जेल से रिहा हुए हैं. उन्होंने बुधवार को ट्रंप से मुलाकात कर उन्हें बताया कि अमेरिका में वह लोग खुद को मुसलमान बता पाते हैं लेकिन पाकिस्तान में खुद को मुसलमान बताना उनके लिए मुश्किलों भरा होता है.

उन्होंने ट्रंप को पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों के साथ होने वाले बर्ताव के बारे में भी बताया. ट्रंप के साथ उनके ओवल ऑफिस में इस अहमदिया मुसलमान की मुलाकात का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. मालूम हो कि ट्रंप के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान की मुलाकात के ठीक पहले वायरल हुआ है, जिसके चलते इसपर खूब चर्चा हो रही हैं.

पाकिस्तान में अहमदियों को नहीं मानते मुसलमान

अब्दुल ने बताया, “साल 1974 में पाकिस्तान ने हमें (अहमदियों) को गैर-मुसलमान घोषित कर दिया था. हमारी दुकानें और घरों को लूटा गया और कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया.” इसी के साथ उन्होंने ट्रंप से कहा कि वह अल्लाह से प्रार्थना करते हैं कि वह उनकी सुरक्षा करें और आपको लंबी उम्र बख्शें. अब्दुल की बात सुनकर ट्रंप ने उनसे हाथ मिलाते हुए कहा कि दुनिया बहुत मुश्किल जगह है फिर भी हमें आगे बढ़ना है और बढ़ते रहना है.

मालूम हो कि पाकिस्तान में अब्दुल को 6 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और पांच साल की सजा सुनाई गई थी. उन्हें पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय की बातों का प्रचार करने के लिए सजा सुनाई गई थी. उन्हें तीन साल पहले ही जेल से रिहा किया गया था.

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