जानें, क्या होता है महाभियोग? ट्रंप से पहले कितने अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर मंडराया इसका खतरा

अमेरिका के इतिहास में ट्रंप से पहले दो अन्‍य राष्‍ट्रपतियों पर महाभियोग की कार्रवाई हुई है. हालांकि उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका.

देश के 243वर्ष के इतिहास में ट्रंप तीसरे ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ा है. उनकी ही तरह एंड्रयू जॉनसन को 1868 में और बिल क्लिंटन को 1998 में बरी कर दिया गया था, जिसमें दोषी ठहराए जाने के लिए सीनेट को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग चलाने के पक्ष में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) ने प्रस्ताव पास कर दिया है. वोटिंग से पहले इस प्रस्ताव पर बहस हुई, इसके बाद 230 में से 197 सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ वोट किया है. साथ ही हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यह माना है कि राष्ट्रपति ने अपने पद और शक्ति का गलत इस्तेमाल किया है.

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप अकेले राष्ट्रपति नहीं हैं जिनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया हो. अमेरिका के इतिहास में ट्रंप से पहले दो अन्‍य राष्‍ट्रपतियों पर महाभियोग की कार्रवाई हुई है. हालांकि उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका.

1868- एंड्रयू जॉनसन
साल 1868 में राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन के खिलाफ भी महाभियोग चला था. उन पर एक सरकारी अधिकारी को गैर कानूनी तरीके से बर्खास्‍त करने का आरोप लगा था. उस समय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में राष्ट्रपति जॉनसन के खिलाफ महाभियोग के 11 आर्टिकल पर वोटिंग हुई थी. इनमें से 9 आर्टिकल में जॉनसन पर अपने सेक्रेटरी ऑफ वॉर एडविन एम. स्टैंटन को हटाने और टेन्योर ऑफ ऑफिस एक्ट के उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए थे. राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन अमेरिका के पहले राष्ट्रपति थे जिनके खिलाफ महाभियोग चलाया गया था. 24 फरवरी को जॉनसन पर महाभियोग चलाया गया और 13 मार्च को सीनेट में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सैल्मन पी. चेस के निर्देशन में उनका महाभियोग परीक्षण शुरू हुआ. 26 मई 1868 को एंड्रयू जॉनसन पर चलाया गया महाभियोगा परीक्षण खत्म हुआ और कानून के मुताबिक सीनेट में राष्ट्रपति एंड्रयू के खिलाफ दो तिहाई बहुमत नहीं मलने से उन्हें क्लीन चिट मिल गई. बता दें कि उस समय राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन का महाभियोग महज एक वोट से बचा था.

1998- बिल क्लिंटन
साल 1998 में अमेरिका के 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन दूसरे राष्ट्रपति थे जिन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ा था. बिल क्लिंटन पर आरोप थे कि उन्होंने एक व्यापक जूरी के सामने झूठी गवाही दी और न्याय में बाधा डाली. दरअसल अपनी इंटर्न मोनिका लेविंस्की से प्रेम संबंधों के स्वरूप को लेकर उन्होंने झूठ बोला था. साथ क्लिंटन ने उससे भी इस मामले में झूठ बोलने को कहा था. पहले आरोप को लेकर बिल क्लिंटन के महाभियोग के पक्ष में हाउस में 228 वोट पड़े थे और विरोध में 206 वोट. वहीं दूसरे आरोप को लेकर पक्ष में 221 वोट पड़े और विरोध में 212 वोट. इसके बाद यह मामला सीनेट में 1999 में आया था पर इसे दो तिहाई बहुमत की मंजूरी नहीं मिल पाई और बिल क्लिंटन को पद नहीं हटाया गया.

यहां बता दें कि 1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था. इसे ‘वॉटरगेट स्कैंडल’ का नाम दिया गया था, लेकिन महाभियोग चलाने से पहले उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था क्योंकि उन्हें मालूम था कि अगर मामला सीनेट तक पहुंचा तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है.

क्या होता है महाभियोग प्रस्ताव ?
महाभियोग वो प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जजों को हटाने के लिए किया जाता है. कई लोगों का मानना है कि महाभियोग का मतलब राष्ट्रपति को हटाना होता है. लेकिन असल में महाभियोग दो चरणों में होता है. महाभियोग एक तरह की जांच है जिसके जरिए राष्ट्रपति को उनके पद से हटाया जा सकता है. अमेरिका में महाभियोग दो चरणों में होता है. जिसे अमेरिकन कांग्रेस के दो सदन से होकर गुजरना होता है. इसमें जो दो चरण होते हैं, वो हैं..

  • पहला चरण महाभियोग
  • दूसरा चरण राजनीतिक प्रक्रि​या

पहले चरण में निचला सदन यानी ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स’ के नेता राष्ट्रपति पर लगे आरोपों को देखते हैं और तय करते हैं कि राष्ट्रपति पर औपचरिक तौर पर आरोप लगाएं जाएं या नहीं. इस चरण को कहा जाता है, “महाभियोग के आरोपों की जांच आगे बढ़ाना.”

दूसरे चरण में ऊपरी सदन, सीनेट इस मामले को आगे बढ़ाते हुए जांच करता है कि राष्ट्रपति दोषी हैं या नहीं. अगर वो दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें पद छोड़ना होता है और उनकी जगह उप राष्ट्रपति को कार्यभार संभालते हैं. सीनेट में राष्ट्रपति के महाभियोग के लिए दो तिहाई वोट होना जरूरी है.

 

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