चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच जापान में अगले महीने हो सकती है क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक- रिपोर्ट

जापान (Japan) सरकार के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दूसरे देश के ये पदाधिकारी जापान के नए प्रधान मंत्री योशीहिदे सुगा (Yoshihide Suga) से भी मुलाकात कर सकते हैं.

पोम्पिओ जयशंकर की होगी मुलाकात (File Photo)

इंडियन पेसिफिक रीजन में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री अगले महीने टोक्यो में एक बैठक आयोजित करने की योजना बना रहे हैं.

जापान टाइम्स ने यह जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनावायरस प्रतिबंध के कारण मार्च के बाद किसी भी विदेशी अधिकारी की यह पहली जापान यात्रा होगी. जापानी सरकार के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दूसरे देश के ये पदाधिकारी जापान के नए प्रधान मंत्री योशीहिदे सुगा से भी मुलाकात कर सकते हैं.

दरअसल इंडो-पेसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए जापान के पूर्व प्रधान मंत्री शिंजो आबे के नेतृत्व में “क्वाड” के रूप में जाना जाने वाला चार देशों का एक ग्रुप बनाया गया था. ग्रुप के विदेशी प्रमुखों की पहली बैठक सितंबर 2019 में न्यूयॉर्क में हुई थी.

मेडिकल सेक्टर में चीन से निपटने के तरीकों पर होगा विचार

दूसरी अनुमानित बैठक में अधिकारियों को जापान और अमेरिका के “फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक” विचार को साकार करने के लिए अपने देशों के सहयोग की पुष्टि करने की संभावना है. साथ ही इस बैठक में कोरोना वैक्सीन के विकास सहित चिकित्सा क्षेत्र में चीन के आक्रामक रवैये से निपटने के तरीकों पर चर्चा भी उम्मीद है.

जापान सरकार के सूत्रों ने कहा, “विशेष रूप से कोरोनावायरस संकट में, चार देशों के विदेश मंत्रियों की यह बैठक का काफी महत्वपूर्ण होगी.” इंडो-पेसिफिक रीजन को बड़े पैमाने पर हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर सहित पश्चिमी और मध्य प्रशांत महासागर के क्षेत्र के रूप में देखा जाता है.

दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में आगे बढ़ रहा चीन

दक्षिण चीन सागर में चीन के क्षेत्रीय दावों और हिंद महासागर में आगे बढ़ने के उसके प्रयासों को मौजूदा नियम और कानूनों के विरुद्ध देखा जा रहा है. वहीं इसके उलट वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी दक्षिण चीन सागर में अपना दावा करते हैं.

वहीं निक्केई एशियन रिव्यू के अनुसार, कई संबंधित राष्ट्र पहले ही खतरे को कम करने के लिए एक-दूसरे और अमेरिका के साथ सुरक्षा संबंधों को गहरा कर रहे हैं.

पिछले कुछ सालों में, जापान ने इस क्षेत्र में बीजिंग की गतिविधियों के बारे में विशेष रूप से विवादित सेनकाकू द्वीपों के साथ स्थिति के बारे में बढ़ती चिंताओं को व्यक्त किया है, जिसे चीन में डियाओडाउ द्वीप के रूप में जाना जाता है और चीन उसे अपना क्षेत्र बताता है.

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