पाकिस्तान में सरकार पर अपना शिकंजा मजबूत कर रही सेना, घटी पीएम इमरान की पॉपुलैरिटी

अभी पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) में एक दर्जन से अधिक पूर्व और मौजूदा सैन्य अधिकारी हैं. ये अधिकारी सरकारी भूमिकाओं में रहकर एयर कैरियर, पावर रेगुलेटर और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ जैसे अहम विभागों का नेतृत्व कर रहे हैं.

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  • Publish Date - 7:13 am, Thu, 11 June 20

पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) में सेना की क्या भूमिका है यह तो सभी जानते ही हैं. कई अधिकारी सरकार में रहकर पाकिस्तान पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अभी पाकिस्तान सरकार में एक दर्जन से अधिक पूर्व और मौजूदा सैन्य अधिकारी हैं. ये अधिकारी सरकारी भूमिकाओं में रहकर एयर कैरियर, पावर रेगुलेटर और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ जैसे अहम विभागों का नेतृत्व कर रहे हैं. इन 12 अधिकारियों में से तीन की नियुक्ति पिछले दो महीने में हुई है.

इमरान खान की लोकप्रियता घटी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (PM Imran Khan) की लोकप्रियता और प्रभाव अब पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इमरान की सरकार गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और सरकारी लोगों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के मामलों से जूझ रही है. साल 2018 में जब इमरान खानी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की गद्दी संभाली थी, तो उन्होंने ‘नया पाकिस्तान’ बनाने का वादा किया था, लेकिन लगता है अभी यह बहुत दूर है.

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एनालिस्ट्स ने लंबे समय से सेना (Pakistan Army) के समर्थन को इमरान खान की पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना है, जो संसद में 46 प्रतिशत सीट रखते हैं. कुछ मायनों में यह कोई नई बात नहीं है क्योंकि सेना, पाकिस्तान की सबसे शक्तिशाली संस्था है और उसने अपने सात दशक के इतिहास में सबसे ज्यादा लंबे समय तक देश में शासन किया है.

देश नीति बनाने में नहीं आम नागरिकों की जरूरत

ऑनलाइन रिपोर्ट्स के अनुसार, अहम पदों पर मौजूदा और पूर्व सैन्य अधिकारियों की भर्ती कर पाकिस्तान जताने की कोशिश कर रहे है कि देश में नीति बनाने और फिर उन्हें लागू करने के लिए आम नागरिकों की कोई जरूरत नहीं है. कोरोनावायरस संकट के दौरान सैन्य अधिकारियों को इस समय प्रेस ब्रीफिंग करते हुए देखा गया है. इसके अलावा ये अधिकारी महमारी रिस्पॉन्स टीम की मदद करते हुए भी देखे गए हैं.

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा अभी इमरान खान के कम्युनिकेशन एडवाइजर हैं. इतना ही नहीं वो चीन के बेल्ट-एंड-रोड इनिशिएटिव के हिस्से के रूप में पाकिस्तान के निवेश में 60 बिलियन डॉलर के कार्यान्वयन की देखरेख भी करते हैं.

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