LAC पर चीन बसा रहा गांव, भारतीय सेना के लिए पहेली बने ‘मॉडल विलेज’

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पार ऐसे करीब दो दर्जन गांव बसाए गए हैं. इनमें से ज्यादातर अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के सामने ईस्टर्न सेक्टर में हैं.

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन तेजी से निर्माण कार्य करा रहा है. जानकारी के मुताबिक चीन की सेना यहां पर गांव बसा रही है, साथ ही कैंट क्षेत्र का भी विस्तार कर रही है. चीन के इस कदम का मकसद है कि वह सीमा पर आम नागरिकों के साथ सेना की मौजूदगी को भी सुनिश्चित कराना चाहती है.

सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में यहां बड़ी-बड़ी रिहायशी बिल्डिंग का निर्माण किया गया है, जहां पर बास्केटबॉल, वॉलीबॉल कोर्ट, शॉपिंग मॉल सहित तमाम संसाधन मुहैया कराए गए हैं.

हालांकि, ऐसा लग रहा है कि फिलहाल यहां नागरिक आबादी नहीं रहती और ये अभी तक खाली पड़े हैं. एक अधिकारी ने कहा, ‘इसे नागरिक और सेना दोनों इस्तेमाल कर सकते हैं और ऐसा विस्तार की स्थिति में जमीन पर अपने दावे को और मजबूत करने के लिए किया जा रहा है. ये निर्माण वास्तव में सैन्य छावनियों का विस्तार हैं.’

इन जगहों पर निगरानी टॉवर बने हैं और ये इलाके चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की कड़ी निगरानी में हैं. भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा की धारणा को लेकर मतभेद है जो कि सीमा निर्धारित करती है. अक्सर अपने क्षेत्रों में गश्त करते समय भारतीय और चीनी सैनिकों का आमना-सामना होता है.

वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार ऐसे करीब दो दर्जन एकीकृत गांव बसाए गए हैं. इनमें से ज्यादातर अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के सामने ईस्टर्न सेक्टर में हैं. दरअसल एलएसी को लेकर दोनों ही देशों के बीच स्थिति साफ नहीं है. अक्सर भारत और चीन के बीच यहां सीमा को लेकर झड़प होती रहती है.

दोनों देशों की पेट्रोलिंग टुकड़ियों के बीच तनाव बना रहता है. एलएसी पर इस तरह की तकरीबन दो दर्जन इमारतें तैयार की गई हैं. जोकि अधिकतर अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के पूर्वी सेक्टर में हैं. जानकारी की अनुसार यहां पर होटल भी बनाने की योजना है. इन गांवों को इसलिए तैयार किया गया है ताकि यहां पर चीन के आदिवासी लोगों को बसाया जा सके.

हांलाकि भारत की फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है कि एलएसी के पास आबादी बसाई जाए, ल्किन फॉरवर्ड एरिया तक आम लोगों को जाने की परमिशन दी जा रही है. एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि जब तक हम कहते हैं कि वह जगह हमारी है तो हमें अपने लोगों को वहां जाने देना चाहिए.

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