कश्मीर मुद्दे पर चीन ने चली चाल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में की चर्चा कराने की मांग

राजनयिक ने कहा कि चीन ने सुरक्षा परिषद की कार्यसूची में शामिल ‘भारत-पाकिस्तान सवाल' पर चर्चा की मांग की है.

नई दिल्ली: चीन ने भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म किए जाने पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की है. एक वरिष्ठ राजनयिक ने बताया कि पाकिस्तान ने इस बारे में अगस्त महीने में सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष पोलैंड को पत्र लिखा था. उन्होंने बताया कि बैठक बुलाने का अनुरोध हाल ही में किया गया. हालांकि, बैठक के लिए अभी तक कोई समय तय नहीं किया गया है.

राजनयिक ने कहा, “चीन ने सुरक्षा परिषद की कार्यसूची में शामिल ‘भारत-पाकिस्तान सवाल’ पर चर्चा की मांग की है. यह मांग पाकिस्तान की ओर से सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्र के संदर्भ में की गई है.”

उन्होंने बताया कि चीन ने भी सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध किया है, लेकिन पोलैंड को बैठक की तारीख और समय तय करने से पहले अन्य सदस्यों से परामर्श करना होगा. बैठक के समय को लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं किया है लेकिन शुक्रवार की सुबह सबसे नजदीकी विकल्प होगा.

PAK विदेश मंत्री ने रखी थी मांग
गौरतलब है कि हाल में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि उनके देश ने, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के भारत के फैसले पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की औपचारिक मांग की है.

कुरैशी ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा परिषद अध्यक्ष से ‘भारत के फैसले से दक्षिण एशिया में शांति एवं सुरक्षा के लिए पैदा हुए खतरों’ पर विचार के लिए परिषद की आपात बैठक बुलाने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि भारत का फैसला ‘अवैध है और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के खिलाफ है.

‘भारत का आंतरिक मामला है कश्मीर’
मालूम हो कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की थी. इस मुलाकात में उन्होंने स्पष्ट किया था कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने का फैसला भारत का आंतरिक मामला है.

उन्होंने कहा था कि यह बदलाव बेहतर प्रशासन और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए है एवं फैसले का असर भारत की सीमाओं और चीन के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर नहीं पड़ेगा.

जयशंकर ने कहा, “वर्तमान विश्व में अनिश्चितता भरी हुई है. भारत-चीन संबंधों का वैश्विक राजनीति में अपना विशेष स्थान है. गत वर्ष दोनों देशों के नेताओं ने वूहान में सफलता से अनौपचारिक भेंट की. जिसने भारत-चीन संबंधों के विकास को मजबूत किया है.”

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