तिब्बत के लोगों को जबरन मजदूर बना रहा चीन, मिलिट्री स्टाइल ट्रेनिंग सेंटर्स में दिया जा रहा प्रशिक्षण

चीन तिब्बत (Tibet) के लोगों को जबरदस्ती मजदूर बना रहा है. चीन (China) में बने मिलिट्री स्टाइल ट्रेनिंग कैंप (Military Style Camp) में 2020 के पहले सात महीनों में करीब 5 लाख लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 6:59 pm, Tue, 22 September 20

तिब्बत (Tibet) पर चीन के अत्याचारों की एक और नई तस्वीर सामने आई है. चीन सरकार (China Government) तिब्बत के लोगों को उनकी जमीन से दूर जबरन मजदूर बनाने के मिशन में जुटी है. चीन में मिलिट्री स्टाइल ट्रेनिंग सेंटर्स बनाए गए हैं, जहां तिब्बत से लोगों को जबरन लाकर उनसे मजदूरी करवाई जा रही है. ये सेंटर्स पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में बनाए गए हैं.

चीन की सरकारी मीडिया की 100 से अधिक रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि चीन सरकार ने तिब्बत समेत कई हिस्सों से बड़ी संख्या में मजदूरों को ट्रांसफर करने का कोटा निर्धारित किया है. इन कैंप में ट्रेनिंग के जरिए चीन अपने उद्योगों के लिए मजदूर पैदा कर रहा, जो उसके लिए सस्ते और वफादार साबित हो सकें. इससे पहले भी कई बार चीन पर अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक नियमों के उल्लंघन के कई गंभीर आरोप लग चुके हैं.

5 लाख लोगों को दी जा चुकी ट्रेनिंग

तिब्बत की रीजनल सरकारी वेबसाइट पर पिछले महीने पोस्ट की गई एक नोटिस के अनुसार साल 2020 के पहले सात महीनों में इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 5 लाख लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है. यह इस क्षेत्र की कुल आबादी का 15 फीसदी हिस्सा है.

इनमें से 50,000 लोगों को तिब्बत के अंदर ही अलग-अलग कंपनियों में काम करने के लिए भेजा जा चुका है और अन्य लोगों को चीन के दूसरे हिस्से में भेजा गया है. इनमें से अधिकतर लोगों को कम मजदूरी वाले टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और एग्रीकल्चर के क्षेत्र में काम पर रखा गया है.

संकट में तिब्बत की आजीविका

तिब्बत-शिनजियांग के एक स्वतंत्र रिसर्चर एड्रियन जेंज ने कहा कि 1966 से 1976 की चीन की कल्चर रेवोल्यूशन के बाद यह तिब्बती आजीविका पर अब तक का सबसे मजबूत हमला है.

इससे न सिर्फ तिब्बत की संस्कृति खत्म होगी बल्कि लोगों के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो जाएगा. वॉशिंगटन डीसी की जेम्सटाउन फाउंडेशन की विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तिब्बत के किसानों को दिहाड़ी मजदूर बनाने की साजिश है.

आरोपों को किया खारिज

तिब्बत के लोगों को जबरन मजदूर बनाने के आरोप को चीन के विदेश मंत्रालय ने खारिज किया है. अपने बयान में मंत्रालय ने कहा कि चीन कानून के शासन वाला देश है. श्रमिक स्वैच्छिक हैं और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाता है. इन मजदूरों को कुछ लोग बंधुआ मजदूर कह रहे हैं, जो उचित नहीं है. हमें उम्मीद है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय सही के पक्ष में खड़ा होगा.