चीन को अब उस अवाम की चिंता जिसे दुनिया से छिपाए रखा

आखिर अपनी आबादी का आंकड़ा देखकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) डरे हुए क्यों हैं? उनके हाथ-पैर फूले हुए क्यों हैं?आखिर उस आंकड़े में ऐसा क्या है जिस सच को बीजिंग (Bijing) ने दुनिया से छिपाने का फरमान जारी कर दिया है.
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सवाल उठता है कि अपनी जिस अवाम को देखकर चीन (china) के निजाम अब तक नाक-भौं सिकोड़ते रहे उनकी चीन ने चिंता करनी क्यों शुरू कर दी है. सवाल उठता है कि अपनी जिस अवाम को चीन गुलाम की तरह मानता आ रहा है उस अवाम के आंकड़ों में हेराफेरी की नौबत क्यों आ पड़ी है.

सवाल ये भी उठता है कि आखिर अपनी आबादी का आंकड़ा देखकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) डरे हुए क्यों हैं? उनके हाथ-पैर फूले हुए क्यों हैं?आखिर उस आंकड़े में ऐसा क्या है जिस सच को बीजिंग (Bijing) ने दुनिया से छिपाने का फरमान जारी कर दिया है. दरअसल हकीकत ये है कि चार दशक से तरक्की कर रहे चीन का सूरज अब ढलने लगा है.

अगले दशक से चीन अपना पतन रोक नहीं पाएगा. 80 के दशक में जापान में जो कुछ हुआ उससे भी बुरा चीन के साथ होने वाला है. दरअसल चीन को अपने देश की इस बढ़ती भीड़ में लहलहाती अर्थव्यवस्था नजर आती रही है. गुलाम और बंधुआ मजदूर नजर आते रहे हैं.. दिन ब दिन गुलजार होता देश का मैन्युफेक्चरिंग हब नजर आता रहा है.

चीन ने इस सच को पूरी दुनिया से छिपाने का आदेश जारी कर दिया

अब ये आबादी ही चीन की कम्युनिस्ट सरकार के होश उड़ा रही है और एक ऐसे संकट की ओर इशारा कर रही है, जो बता रहा है कि अगले दशक से ड्रैगन का देश चीन डूबने लगेगा.संकट इतना गंभीर है कि बीजिंग ने इस सच को पूरी दुनिया से छिपाने का आदेश जारी कर दिया है. वो इस साल की 17 जनवरी की तारीख थी, जब चाइनीज नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स ने देश का सेंसस डाटा जारी किया.

इसमें दावा किया गया कि आबादी के हिसाब से चीन अब भी दुनिया का नंबर वन देश है.चीन में दिसंबर 2019 तक की गणना में 1.4 अरब आबादी पाई गई है, जिनमें 71.5 करोड़ पुरुष और 68.4 करोड़ महिलाएं हैं. लेकिन दुनिया भर के जानकारों ने चीन का झूठ पकड़ लिया है, और चीन के उस डर को भी पकड़ लिया है जो चीन की आबादी के आंकड़ों में छिपा है.

MICA अहमदाबाद के प्रेसिडेंट और डायरेक्टर शैलेंद्र राज मेहता ने अपने एक लेख में इसका खुलासा करते हुए बताया है कि अगर चीन की आबादी के आंकड़ों की गहराई से पड़ताल करें तो पता चलता है कि साल 2000 में चीन में 5 से 10 साल की उम्र के 9 करोड़ बच्चे थे.15 साल बाद ये ही बच्चे जब 20 से 25 साल की उम्र में पहुंचे. तब उनका आंकड़ा बढ़कर 10 करोड़ हो गया.2019 में ये ही आबादी 11.3 करोड़ की हो गई. जिसका मतलब ये हुआ कि 13 साल में चीन में 2.3 करोड़ भूतिया आबादी पैदा हो गई.

चीन ने आबादी के आंकड़ों में क्यों की हेराफेरी

सामान्य ज्ञान कहता है कि चीन में जितने बच्चे पैदा हुए.. उनमें से कुछ की मृत्यु भी हुई होगी, अगर ना भी हुई हो तो बच्चों की संख्या उतनी की उतनी ही रहती.लेकिन चीन को ये गंवारा नहीं था कि पूरी दुनिया को पता चल जाए, कि जो मुल्क सुपर पावर बनने का ख्वाब देख रहा है उसका दीया टिमटिमा रहा है और इसलिए उसने हर आयु वर्ग की आबादी में आंकड़ों का हेरफेर शुरू कर दिया.

विश्लेषकों ने जिस आयु वर्ग के आंकड़े में हेराफेरी पाई उससे पांच साल पहले के वर्ग में 1.4 करोड़ लोग अधिक निकले. अनुमान जताया जा रहा है कि चीन की जनसंख्या के आंकड़े में 10 करोड़ लोगों को जोड़ा गया है. ताकि आबादी के हिसाब से चीन दुनिया का सबसे बड़ा देश बना रहे और भारत से आगे रहे.

क्यों ढल रहा ड्रैगन का सूरज

कम्युनिस्ट देश में बंधुआ मजदूर नर्क से भी बदतर हालात में जीते हैं और इन्हीं की जिंदगी छीनकर चीन चमकता है पूरी दुनिया में कारोबार करता है और सस्ता माल बेच पाता है.लेकिन चीन ने जिस अवाम के बूते अपने मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर को चमकाया और अवाम बूढ़ी होती गई.1982 की वन चाइना पॉलिसी ने नौजवानों की नई खेप आने नहीं दी.

यही वजह है कि ड्रैगन का सूरज ढल रहा है.चीन का दीया टिमटिमा रहा है, और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आखिरी लौ की तरह फड़फड़ा रहे हैं. चीन को डर है कि उसकी हालत जापान से भी बदतर हो सकती है, जहां 15-20 साल पहले ही वक्त का पहिया घूमा था और वो विकास की रेस से बाहर हो गया.चीन की हालत ज्यादा बुरी इसलिए है कि वहां पर लड़का-लड़की का अनुपात दुनिया में सबसे बुरा है.

जापान से भी बुरे दौर से गुजर रहा चीन

1982 में एनबीएस ने चीन में सेक्स रेशियो 108 बताया था. इसके बाद चीन ने वन चाइल्ड पॉलिसी लागू किया था. जिसकी वजह से चीन में लड़का और लड़की की संख्या में भारी गैप आता गया.चीन में बेटे की चाह बढ़ती गई. पिछले 35 सालों में चीन में 100 लड़कियों पर लड़कों की संख्या बढ़कर 120 तक पहुंच चुकी है. साल 2010 के बाद से चीन लड़कियों की संख्या को भी मैनेज करने में जुटा है.यानी चीन जापान से भी बुरे दौर से गुजर रहा है, जिसमें उसके बचने की कोई गुंजाइश नजर नहीं आती.

वक्त का पहिया घूमकर अब चीन तक पहुंचा

ये बहुत पुरानी बात नहीं है जब दुनिया ने जापान को बेहिसाब तरक्की करते देखा था. वो साल था 1980 जब जापान का दुनिया पर दबदबा इस कदर बढ़ गया कि उसने चीन पर Falklands-style war का सपना देखना तक शुरू कर दिया.चीन से अपने शेन्काकू द्वीप को आजाद कराने की योजना भी बनाने लगा लेकिन इसके पंद्रह साल के अंदर जापान सिमट गया.1995 के बाद से जापान की विकास दर धीमी हुई और 2005 तक जापान विकास की रेस से बाहर हो गया.

वक्त का पहिया घूमकर अब चीन तक पहुंच चुका है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के हार्डलाइनर मानते हैं कि वो इस वक्त पूरी दुनिया को दबा सकते हैं. दक्षिण चीन सागर को अपनी कॉलोनी बना सकते हैं. हथियारों के दम पर भारत अमेरिका को अपनी जगह दिखा सकता है. लेकिन चीन का सूरज कितनी तेजी से ढल रहा है ये दो आंकड़े बताते हैं.

चीन में 15 से 59 साल की उम्र के बीच की आबादी

ये आंकड़े बताते हैं कि चीन अब चिंग डायनेस्टी से भी बुरे दौर में जा चुका है.1790 में जब चीन की आबादी 30 करोड़ थी तब वहां सालाना जन्म दर 1 करोड़ थी. जिनपिंग को ये ही चिंता खाए जा रही है क्योंकि चीन का अब चलना तो दूर अगले दशक से उठ पाना भी मुश्किल है.

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