अब मंगल ग्रह तक जा पहुंची चीन-अमेरिका की रेस

राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन को स्पेस सुपरपावर के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहते हैं. चीन का रोवर पहले से ही चंद्रमा पर है और अब ड्रैगन अपना स्पेस स्टेशन, लूनार बेस बनाने और 2030 तक क्षुद्रग्रहों की तलाश की खोज है.
China preparing to reach mars this year, अब मंगल ग्रह तक जा पहुंची चीन-अमेरिका की रेस

अमेरिका-चीन की प्रतिद्वंद्विता को अब दूसरे ग्रह तक जा पहुंची है. चीन की स्पेस एजेंसी इस साल मंगल तक पहुंचने के लिए एक खास मिशन की तैयारी में है.

ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है कि लाल ग्रह मिशन के जरिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग स्पेस सुपरपावर के रूप में चीन को प्रोजेक्‍ट करना चाहते हैं. चीन का रोवर पहले से ही चंद्रमा पर है और अपना स्पेस स्टेशन, लूनार बेस बनाने और 2030 तक क्षुद्रग्रहों की तलाश की खोज है.

नॉन प्रॉफिट फाउंडेशन द प्लेनेट्री सोसायटी के सोलर सिस्टम स्पेशलिस्ट इमिले लकड़ावाला के मुताबिक, ‘वैश्विक स्तर पर तकनीक कौशल का प्रदर्शन साख का सवाल है. लेकिन वो लेंडिंग में कामयाब रहे तो ये एक बड़ी उपलब्धि होगी’. चीन के वैज्ञानिक 39 मिलियन माइल्स दूर मंगल ग्रह तक पहुंच बनाने को लेकर बेताब है, जिसे मंदारिन भाषा में हूजिंग या फायर स्टार कहा जाता है. मंगल और पृथ्वी ऑर्बिट में उस समय नजदीक होंगे. ऐसा हर 26 महीने में होता है.

अमेरिका, यूरोप, रूस और यूनाइडेट अरब अमीरात की स्पेस एजेंसियां जुलाई या अगस्त में रिकॉर्ड संख्या में रोबोटिक मिशन लॉन्च करेंगी, जब दोनों ग्रह सबसे नजदीक होंगे. प्राइवेट सेक्टर में एलन मस्क की स्पेस एजेंसी और रिचर्ड ब्रान्सन का वर्जिन ऑर्बिट एलएलसी भी मार्स पर जाने की तैयारी में हैं.

सबसे अहम बात ये है कि इन पड़तालों से वैज्ञानिकों को ये पता चल सकेगा कि मानव ब्रह्मांड में कहीं ओर रह सकते हैं या नहीं. मंगल को काफी हद तक पृथ्वी जैसा समझा जाता है और इन मिशन से और परतें खुल पाएंगी. मार्स सोसाइटी चीन के सह-संस्थापक ने कहा , “राष्ट्रीय स्तर पर यूएस ने ये किया है, और हम चीन में यह कर सकते हैं”.

हालांकि, चीन ने 2012 में भी मंगल पर जाने की कोशिश की थी, लेकिन तब उसका स्पेसक्राफ्ट क्रैश हो गया था. उम्मीद है कि इस साल चीन दूसरा प्रयास करेगा. अगर ये प्रयास सफल रहा तो एक ऑर्बिटर मंगल की परिक्रमा करेगा और रोवर सतह पर उतरेगा. इस यात्रा में सात महीने लगेंगे. एक्सपर्ट के मुताबिक, चीन का मिशन बेहद मुश्किल है, जिसमें ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल हैं. अगर चीन को इस स्पेशल प्रोजेक्ट में सफलता मिलती है जो निश्चित तौर पर स्पेस के क्षेत्र में चीन का कद बढ़ेगा.

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