आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान लाचार, चीन-सऊदी-अमेरिका ने दिए FATF में ब्लैक लिस्ट करने के संकेत

तुर्की को छोड़कर लगभग FATF के सभी सदस्य देशों ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है. सभी देश चाहते हैं कि पाकिस्तान जून 2020 तक आतंकवाद के खिलाफ अपने 13 सूत्रीय एक्शन प्लान को पूरा कर ले.
Pakistan blacklisting in FATF, आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान लाचार, चीन-सऊदी-अमेरिका ने दिए FATF में ब्लैक लिस्ट करने के संकेत

पाकिस्तान को आतंकवाद के मसले पर घेरने के लिए भारत का साथ देने चीन और सऊदी अरब भी अब सामने आ गया है. चीन और सऊदी के अलावा अमेरिका सहित कई युरोपीय देशों ने भी इस साल जून महीने में होनेवाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने और फंडिंग रोकने को लेकर कड़ा संदेश दिया है.

डेडलाइन में पूरा करे अपना करार

इन तमाम देशों ने पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अपने वादे को FATF की डेडलाइन में ही पूरी करने के लिए कहा है. इसके तहत पाकिस्तान के सभी आतंकी संगठनों के सरगनाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई किया जाना भी शामिल है.

इंडियन एक्सप्रेस में डिप्लौमैटिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान को FATF की ओर से ब्लैकलिस्ट होने से बचाने के लिए तुर्की आखिर तक मजबूती से खड़ा रहा. जबकि चीन के रुख में यह बड़ा यू टर्न कहा जा सकता है. इसके पहले चीन ने हमेशा FATF में पाकिस्तान का समर्थन ही किया है.

पाकिस्तान अगर जून की बैठक से से पहले आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करता है तो उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे. फिलहाल एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में ही रहेगा. FATF आज यानी गुरुवार को पाकिस्तान के ब्लैकलिस्ट होने के मामले पर आधिकारिक तौर पर घोषणा कर सकता है.

पीएम मोदी-जिनपिंग मुलाकात में उठा था मुद्दा

महाबलिपुरम की अनौपचारिक समिट के दौरान बीते साल विदेश मंत्रालय ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आतंकवाद दोनों देशों के लिए एक खतरे के रूप में बरकरार है. पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने साझा बयान में कहा था कि एक विशाल और विविधता वाले देश के नाते हम यह तय करेंगे कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवादियों के प्रशिक्षण और उनकी फंडिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे.

पाकिस्तान की सारी कोशिशें नाकाम

पाकिस्तान अपनी जनता और पूरी दुनिया को गुमराह करने की कोशिश में हमेशा से FATF की कार्रवाई को लेकर गलत फैक्ट और चुनिंदा बातें लीक कराता रहता है. इसके अलावा उसकी जारी तमाम कोशिशों के बावजूद वह FATF की ग्रे लिस्ट में बना हुआ है. पाकिस्तान के सामने अब ये संकट है कि अगर FATF के मानकों के मुताबिक कार्रवाई नहीं करता है तो वह आने वाले समय में ब्लैकलिस्ट हो सकता है.

तुर्की को छोड़कर लगभग FATF के सभी सदस्य देशों ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है. सभी देश चाहते हैं कि पाकिस्तान जून 2020 तक आतंकवाद के खिलाफ अपने 13 सूत्रीय एक्शन प्लान को पूरा कर ले. इस प्लान में सभी आतंकी संगठनों के सरगनाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करना भी शामिल है.

फिलहाल ग्रे लिस्ट में ही रखने का सुझाव

जून महीने में होने वाली FATF बैठक से पहले पाकिस्तान के मामले की समीक्षा कर रहे एक समूह ने सुझाव दिया है कि आतंक को फंडिंग को रोकने में उसकी नाकामी की वजह से उसे ग्रे लिस्ट में ही रखा जाना चाहिए. वहीं पाकिस्तान लंबे वक्त से तुर्की की मदद से FATF की प्रक्रिया का राजनीतिकरण करने की कोशिश करता रहा है.

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