जिनपिंग के भारत दौरे से पहले चीन ने कश्मीर मुद्दे पर बदला स्टैंड, कहा- UN चार्टर के मुताबिक हो फैसला

जम्मू-कश्मीर का मसला पुराने इतिहास का एक विवाद है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के नियमों से सुलझाना चाहिए.
Congress questions govt over Chinas U-turn on Kashmir, जिनपिंग के भारत दौरे से पहले चीन ने कश्मीर मुद्दे पर बदला स्टैंड, कहा- UN चार्टर के मुताबिक हो फैसला

चेन्नई से 56 किलोमीटर दूर महाबलिपुरम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है. वहीं चीन बार-बार कश्मीर को लेकर अपान बयान बदल रहा है. चीन ने कश्मीर मुद्दे पर हाल के बयान के बाद एक बार फिर से अपना स्टैंड बदल लिया है. चीन का कहना है कि भारत-पाकिस्तान को इस मसले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के हिसाब से सुलझाना चाहिए.

ये बयान चीन के हालिया बयान से अलग है जिसमें उसने कश्मीर मुद्दे को भारत-पाकिस्तान का आंतरिक मुद्दा बताया था. चीन के इस ताजा बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है.

ज़ाहिर है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस समय चीन दौरे पर हैं. इमरान ने यहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जम्मू-कश्मीर के मसले पर एक साझा बयान जारी किया गया.

चीन ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान की ओर से उसे जम्मू-कश्मीर के ताजा हालात की जानकारी मिली है. चीन इस मामले में नज़र बनाए हुए है. जम्मू-कश्मीर का मसला पुराने इतिहास का एक विवाद है, जिसे शांतिपूर्ण तरीके से संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के नियमों के हिसाब से सुलझाना चाहिए.

वहीं भारत की तरफ से विदेश मंत्राललयय प्रवक्ता रवीश कुमार ने चीन के बयान पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का पक्ष पुराना ही है और ये स्पष्ट है कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है. चीन हमारे पक्ष से अच्छी तरह वाकिफ है. भारत के आंतरिक मामलों पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है.

इससे पहले चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने अपने बयान में कहा था कि कश्मीर मुद्दे को भारत और पाकिस्तान के बीच हल किया जाना चाहिए.

वहीं कांग्रेस चीन के बदले सुल को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साध रही है. कांग्रेस का कहना है कि चीन बार-बार भारत के आंतरिक मामलों में टांग अड़ा रहा है. भारत सरकार अब तक चीन पर रोक लगाने में नाकाम रहे हैं. भारत सरकार हांग-कांग और जिनजियांग के मुद्दे को लेकर चीन से क्यों नहीं कहता.

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