अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है कोरोना, हो सकती हैं ये परेशानियां

सीडीसी (CDC) की रिपोर्ट में सामने आया कि गर्भवती महिलाओं में न सिर्फ कोरोना (Covid-19) के लक्षण विकसित हुए, बल्कि कई मामलों में उन्हें ICU में भर्ती कराने और वेंटिलेटर पर रखने की भी जरूरत पड़ी.
Corona is more dangerous for pregnant women, अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है कोरोना, हो सकती हैं ये परेशानियां

अमेरिका के संटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रवेंशन (CDC) की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना से संक्रमित अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं को कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं. जन्म के समय इस जानलेवा वायरस से प्रीटर्म और प्रीमेच्योर डिलीवरी जैसी कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है.

सीडीसी की रिपोर्ट में सामने आया कि गर्भवती महिलाओं में न सिर्फ कोरोना के लक्षण विकसित हुए, बल्कि उन्हें ICU में भर्ती कराने और वेंटिलेटर पर रखने की भी जरूरत पड़ी. इस तरह के कई मामलों में प्रीटर्म बर्थ, यानी समय से पहले प्रसव सहित खराब जन्म के परिणाम भी सामने आए थे.

सीडीसी की मोरबिडिटी और मृत्यु दर की साप्ताहिक रिपोर्ट 16 सितंबर को सामने आई, जिसके अनुसार, 1 मार्च से 22 अगस्त के बीच अस्पताल में भर्ती होने वाली 600 महिलाओं में 55 प्रतिशत एसिंप्टोमेटिक यानी जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखे.

एसिंप्टोमेटिक महिलाओं को नहीं पड़ी ICU की जरूरत

वहीं 272 सिंप्टोमेटिक महिलाओं में से 16 प्रतिशत को आईसीयू में भर्ती होना पड़ा, 8 प्रतिशत को वेंटिलेटर की जरूरत थी और दो महिलाओं को Covid-19 से अपनी जान गंवानी पड़ी. किसी भी एसिंप्टोमेटिक महिलाओं को आईसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी और न ही उनमें से किसी की मौत हुई.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि केवल 324 महिलाओं के ही अस्पताल में भर्ती होने का कारण सामने आया है, जिनमें से 75 फीसदी को प्रसव या प्रसूति जैसे संबंधी कारणों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इनमें से केवल 19 प्रतिशत महिलाओं को COVID-19 संबंधित बीमारी या लक्षणों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं में 21 प्रतिशत में हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा जैसी, एक अन्य बीमारी जरूर थी.

97.8 प्रतिशत महिलाओं ने दिया जीवित बच्चों को जन्म

रिपोर्ट में पाया गया कि जिन महिलाओं ने अस्पताल में छुट्टी के समय अपनी गर्भावस्था पूरी कर ली थी, उनमें से 97.8 प्रतिशत ने जीवित बच्चों को जन्म दिया था. वहीं इन महिलाओं में से 2.2 प्रतिशत की गर्भावस्था को नुकसान हुआ. ये सिंप्टोमेटिक और एसिंप्टोमेटिक दोनों महिलाओं को हुआ.

इसमें बताया गया कि 97.8 प्रतिशत जन्मे बच्चों में से 87.4 फीसदी बच्चों का जन्म सही समय पर हुआ, जबकि 13 प्रतिशत बच्चों का जन्म समय से पहले ही हो गया. साथ ही यह भी पाया गया कि सिंप्टोमेटिक महिलाओं प्रिटर्म बर्थ के मामले ज्यादा मिले, 23 फीसदी. जबकि एसिंप्टोमेटिक में यह दर आठ फीसद रही.

गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि बिना लक्षण के वायरस का पता लगा पाना मुश्किल होता है. हालांकि, सीडीसी के वर्तमान दिशानिर्देशों में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना सांक्रमित मरीज के संपर्क में 15 मिनट से ज्यादा नहीं रहा, तो जब तक उसमें लक्षण न दिखे उसे टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है.

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