कोरोना वायरस: वैक्सीन बनाने में जा सकती है 5 लाख शार्क की जान, विशेषज्ञों ने किया सावधान

वैक्सीन बनाने में स्क्वालीन (Squalene) नाम के एक तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है. प्राकृतिक रूप से यह तेल शार्क के लीवर में बनता है. वैक्सीन तेजी से और बेहतर काम करे इसके लिए इस तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 8:58 pm, Sun, 27 September 20

कोरोना वायरस वैक्सीन (Corona Virus Vaccine) मानव जाति के लिए बहुत जरूरी है. लेकिन इस वैक्सीन से शार्क (Shark) मछली के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है. जी हां, ताजा जानकारी के मुताबिक कुछ वैक्सीन बनाने में स्क्वालीन (Squalene) नाम के एक तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है.

प्राकृतिक रूप से यह तेल शार्क के लीवर में बनता है. वैक्सीन तेजी से और बेहतर काम करे इसके लिए इस तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है.

ब्रिटिश कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन इस वक्त फ्लू की वैक्सीन बनाने में स्क्वालीन का इस्तेमाल करती है. एक टन तेल निकालने के लिए 3000 शार्क मछलियों का इस्तेमाल किया जाता है.

5 लाख शार्क की जाएगी जान

कैलिफोर्निया स्थित समूह शार्क एलाइस ने कहा है कि अगर पूरी दुनिया को कोरोना की वह वैक्सीन देना है जिसमें स्क्वालीन हो तो 250,000 शार्क को मारना पड़ेगा. अगर हर व्यक्ति को वैक्सीन की दो डोज दी गई तो यह संख्या पांच लाख हो जाएगी.

शार्क आबादी को खत्म होने से बचाने के लिए, वैज्ञानिक स्क्वालीन के विकल्प का परीक्षण कर रहे हैं. जो गन्ने से मिलेगा.

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शार्क एलाइस की फाउंडर स्टेफनी ब्रैंडल का कहना है कि जानवरों से मिलने वाली चीज का इस्तेमाल हम ज्यादा समय तक नहीं कर सकते. स्क्वालीन के लिए हम इतनी शार्क को नहीं मार सकते. वो भी तब, जब हम यह जानते हैं कि ये ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करते.

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स्टेफनी ने आगे कहा ”हमें नहीं पता कि महामारी कितने समय तक है और कितनी बड़ी होगी. हम यह भी नहीं जानते कि अभी और कितनी महामारी आएंगी. ऐसे में अगर हम वैक्सीन के लिए शार्क का इस्तेमाल करते रहे तो शॉर्क की आबादी पर संकट पैदा हो जाएगा.”

हर साल 30 लाख शार्क मारी जाती हैं

स्क्वालीन के लिए हर साल लगभग तीस लाख शार्क को मारा जाता है. उनके तेल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक के सामान और मशीन के तेल में भी किया जाता है. अचानक से स्कावालीन की अगर मांग बढ़ती है तो शार्क की संख्या में भारी कमी आएगी.