कोरोना वायरस के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, भारतीय मूल के डॉक्टर की अगुवाई में बन रही वैक्सीन

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस कहर मचा रहा है. अब तक चीन में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 30 हजार से अधिक संक्रमित पाए गए हैं.
Indian origin scientist SS Vasan, कोरोना वायरस के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, भारतीय मूल के डॉक्टर की अगुवाई में बन रही वैक्सीन

भारतीय डॉक्टरों का डंका पूरी दुनिया में हमेशा से बजता रहा है और ये हर एक हिंदुस्तानी के लिए फख्र की बात होती है. अब भारतीय मूल के एक डॉक्टर को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाने वाली डॉक्टरों और रिसर्चरों की टीम का हेड बनाया गया है.

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस कहर मचा रहा है. अब तक चीन में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 30 हजार से अधिक संक्रमित पाए गए हैं. पूरी दुनिया में अब तक इससे लड़ने वाली वैक्सीन नहीं बन सकी है लेकिन जल्द ही इस तोड़ मिल सकता है.

कोरोना वायरस से लड़ने के लिेए वैक्सीन बनाने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए लैब में पहले बैच का नेतृत्व ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के वैज्ञानिक एस एस वासन कर रहे हैं.

चीन के स्वास्थ अधिकारियों ने शुक्रवार को जानकारी दी कि कोरोना वायरस से गुरुवार तो 69 अन्य की मौत के बाद मरने वालों की संख्या 636 हो चुकी है. हुबई में गुरुवार को 2447 नए मामले दर्ज किए गए। केवल मध्य चीन प्रांत में 22,112 मामले सामने आए हैं. सीएसआईआरओ में हाई सेक्योरिटी लैब में वायरस के पहले बैच को डेवलप किया गया.

क्‍या है ये वायरस?
Coronaviruses दरअसल वायरस का एक बड़ा समूह है जो जानवरों में आम बात है. यह एक तरह का न्‍यूमोनिया वायरस है. बायोलॉजिकली यह SARS की फैमिली से आता है. अमेरिकी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, दुर्लभ मामलों में, यह वायरस जानवरों से इंसानों में ट्रांसमिट हो सकता है. वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन ने भी इसे लेकर एलर्ट जारी किया है.

हांगकांग यूनिवर्सिटी के एक वायरलॉजिस्‍ट के मुताबिक, “हम इतना जानते हैं कि इससे न्‍यूमोनिया होता है और यह एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट पर रिस्‍पांड नहीं करता. यह अजीब नहीं है मगर SARS 10 फीसदी इंडिविजुअल्‍स को मार देता है.”

कैसे हैं लक्षण?
बुखार आता है. सांस लेने में तकलीफ होती है, सामान्‍य सर्दी जैसे. नाक बहती है, कफ बनता है, गले में खराश रहती है, सिरदर्द हो सकता है. सांस से जुड़ी कई बीमारियों के लक्षण मिलते हैं. जिनका इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर हैं, उन्‍हें न्‍यूमोनिया और ब्रांकाइटिस जैसी बीमारी हो सकती है.

Coronavirus के कुछ टाइप ऐसे हैं जो घातक हैं. ऐसे ही लक्षणों वाला एक वायरस साल 2012 में मिडल ईस्‍ट में सामने आया था. Middle East Respiratory Syndrome यानी MERS से भी सांस की तकलीफें होती थीं मगर उसके लक्षण ज्‍यादा गंभीर थे. हर 10 इंफेक्‍टेड पेशेंट्स में से चार की मौत हो गई थी. SARS के लक्षण भी ऐसे ही हैं. SARS का डेथ रेट 0-50% था.

 

Related Posts