ब्रिटिश राजदूत ने ट्रंप प्रशासन को बताया अनाड़ी तो पीएम थेरेसा के खिलाफ ट्वीट करने लगे अंकल सैम

अमेरिका और ब्रिटेन के बीच अजीब सी स्थिति पैदा हो गई है. अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत के वो मेल लीक जिनमें ट्रंप प्रशासन को लेकर नकारात्मक बातें थीं तो ट्रंप गुस्सा हो गए. अब उनका गुस्सा ब्रिटिश पीएम तक पर उतर रहा है.

अमेरिका और ब्रिटेन के संबंधों में अचानक ही खटास पैदा होने लगी है. इस खटास के पीछे हैं कुछ ई-मेल जो लीक हो गए. ये कूटनीतिक मेल लिखे थे अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत सर किम डैरोच ने. इन ईमेल में डैरोच ने ट्रंप प्रशासन के बारे में अपनी राय लिखी थी. उनकी राय सनडे अखबार में छप गई जिसमें उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप का करियर अपमानजनक स्थिति में खत्म हो सकता है. व्हाइट हाउस के अंदरूनी विवाद आपस में छुरेबाज़ी होने की हद तक जा पहुंचे हैं. हम भरोसा नहीं कर सकते कि ये प्रशासन सामान्य से कुछ ज़्यादा कर पाएगा. कूटनीतिक मामलों में ये प्रशासन अनाड़ी है. ट्रंप प्रशासन अमेरिका फर्स्ट नीति पर चल रहा है.

स्वाभाविक है कि ट्रंप अपने बारे में ये राय सुनकर ज़रूर भड़कते. वो भड़के भी. उन्होंने अपने मन की भड़ास निकालने में देर नहीं की और ट्वीटर पर एक के बाद एक ट्वीट कर डाले.

trump, ब्रिटिश राजदूत ने ट्रंप प्रशासन को बताया अनाड़ी तो पीएम थेरेसा के खिलाफ ट्वीट करने लगे अंकल सैम

ट्रंप से जब राजदूत डैरोच के संदेश पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने पहले तो संदेश देखे जाने से इनकार किया लेकिन टिप्पणी कर दी कि वो डैरोच के आचरण से कह सकते हैं कि वो ब्रिटेन के लिए अच्छा काम नहीं कर रहे. हम ऐसे आदमी को अच्छा नहीं मानते. उनकी बातों से हमारे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता.

बवाल ब्रिटेन तक पहुंचा तो पीएम थेरेसा के प्रवक्ता ने कहा कि राजदूत का काम ईमानदारी से बिना लाग लपेट संबंधित सरकार के बारे में अपनी राय व्यक्त करना होता है. हालांकि सरकार डैरोच के विश्लेषण से सहमत नहीं है. सार्वजनिक हुए संदेश अस्वीकार्य हैं.

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ब्रिटेन-अमेरिका के संबंधों को पहुंचे नुकसान की भरपाई करने के क्रम में ब्रिटिश विदेश मंत्री जर्मी हंट ने बयान दिया कि ट्रंप प्रशासन के बारे में राजदूत की सोच व्यक्तिगत है, ब्रिटिश सरकार की इसमें सहमति नहीं है.

ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका के सामने साफ करने की पुरज़ोर कोशिश की कि मेल के चुनिंदा हिस्सों का लीक होना दोनों देशों के संबंधों की गहराई और सम्मान को प्रदर्शित नहीं करता. दूसरी ओर ट्रंप ने बदले की कार्रवाई करते हुए सोमवार को व्हाइट हाउस में एक आयोजित कार्यक्रम में ब्रिटिश राजदूत को नहीं बुलाया.

खास बात है कि राष्ट्रपति ट्रंप सिर्फ राजदूत डैरोच से ही नाराज़ नहीं हैं बल्कि उनका नजला ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे पर भी गिरा जिन्हें ट्रंप ने ब्रेक्ज़िट पर घेरकर खूब खरी खोटी सुनाई. ट्रंप ने इस बाबत ट्वीट में लिखा-

मैं ब्रेक्ज़िट को लेकर पीएम थेरेसा और ब्रिटेन के तौर-तरीकों का आलोचक रहा हूं. उन्होंने और उनके सहयोगियों ने अव्यवस्था फैलाकर रख दी है. मैंने उन्हें बताया था कि ये कैसे संभालना है लेकिन उन्होंने दूसरा रास्ता चुना. मैं राजदूत को नहीं जानता लेकिन वो अमेरिका में ना तो पंसद किए जाते और ना उनके बारे में किसी के विचार ही अच्छे हैं. हम उनसे आगे संबंध नहीं रखनेवाले. ब्रिटेन के लिए खुशखबरी है कि जल्द ही उन्हें नया प्रधानमंत्री मिलनेवाला है. वैसे मैंने पिछले महीने राजकीय यात्रा (ब्रिटेन की) का लुत्फ लिया और महारानी ने मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया.

ट्रंप का गुस्सा इतने भर से शांत नहीं हुआ. उन्होंने 8-9 जुलाई की रात के बाद शाम फिर लिख डाला-

जो हास्यास्पद राजदूत ब्रिटेन ने अमेरिका पर थोपा था उसे लेकर हम बहुत रोमांचिक नहीं थे, वो दरअसल स्टूपिड है. उन्हें अपने देश और अपनी प्रधानमंत्री की ब्रेक्ज़िट पर असफल बातचीत के बारे में बोलना चाहिए, ना कि इस मामले को बुरी तरह हैंडल करने पर मेरी आलोचना से उदास होना चाहिए. मैंने थेरेसा मे को इसे निपटाने पर सलाह दी थी लेकिन उन्होंने अपना मूर्खता भरा रास्ता ही चुना. ये तबाही है!  मैं राजदूत को जानता तो नहीं लेकिन बताया गया है कि वो मूर्ख हैं. उन्हें कोई बताओ कि अभी तक अमेरिका दुनिया की सबसे अच्छी अर्थव्यवस्था और सेना रखता है.

दरअसल इस तरह के ट्वीट से ट्रंप ने  साफ कर दिया है कि वर्तमान ब्रिटिश राजदूत के लिए अब व्हाइट हाउस के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल होगा. इसी तरह उन्होंने नए बनने वाले ब्रिटिश प्रधानमंत्री की भी चुनौती बढ़ा दी है जिसे अब फैसला करना होगा कि डैरोच आगे भी अपने पद पर रहेंगे या फिर स्वदेश लौटेंगे.