कश्मीर पर दखल देने से पहले अपना घर देखे चीन

अमेरिका द्वारा सख़्ती दिखाने के बाद चीन के तेवर थोड़े नरम दिख रहे हैं.

नई दिल्ली: कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीने जाने और केंद्र प्रशासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और इसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाने में उसकी मदद कर रहा है चीन. ये वही चीन है जो लोकतंत्र की मांग कर रहे हांगकांग के प्रदर्शनकारियों को आतंकी बताकर उनके ख़िलाफ़ हिंसात्मक कार्रवाई कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हांगकांग में हिंसात्मक कार्रवाई को लेकर चीन को चेताते हुए कहा है कि लोकतंत्र समर्थकों पर हिंसक कार्रवाई अमेरिका-चीन के बीच व्यापार वार्ता के लिए नुकसानदेह हो सकती है.

ज़ाहिर है अमेरिका और चीन के बीच महीनों से चल रहे ट्रेड वार को ख़त्म करने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता शुरू करने की कोशिश चल रही है. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान काफी महत्वपूर्ण हो जाता है.

ट्रंप ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि हांगकांग मामले को मानवता के साथ सुलझाया जाए. चीन अगर इस तरह का व्यवहार दिखाता है तो दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार डील पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा.’

ट्रंप के आर्थिक सलाहकार लैरी कुडलो ने कहा, ‘अमेरिका और चीन के व्यापार प्रतिनिधि अगले दस दिनों में मुलाक़ात करने वाले हैं. उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव के बीच इस बातचीत से रास्ता निकलेगा.’

अमेरिका द्वारा सख़्ती दिखाने के बाद चीन के तेवर थोड़े नरम दिख रहे हैं. चीन ने हाल में घोषणा की है कि हांगकांग के प्रदर्शनकारियों के साथ ‘आतंकवादियों’ की तरह बर्बर कार्रवाई नहीं की जाए.

यह वही चीन है जिसने पिछले महीने हांगकांग के मामले में टिप्पणी करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की निंदा करते हुए उसे ‘गंभीर हस्तक्षेप’ बताया था.

दरअसल ट्रंप ने हांगकांग के प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी ‘लोकतंत्र तलाश’ रहे हैं लेकिन ‘कुछ सरकारें लोकतंत्र नहीं चाहती हैं.’

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, ‘हम हांगकांग और चीन के मामले में गंभीर हस्तक्षेप के लिए देश (अमेरिका) की कड़ी निंदा करते हैं और इसका विरोध करते हैं.’

उन्होंने कहा कि चीन उस देश को आगह करता है कि सावधानीपूर्वक बोले और काम करे तथा किसी भी तरह से हांगकांग के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करे. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को हिंसा में शामिल तथा कानून तोड़ने वालों को किसी भी प्रकार से समर्थन नहीं करना चाहिए.

बता दें कि अर्द्ध स्वायत्त हांगकांग में एक विधेयक को लेकर कुछ हफ्तों से प्रदर्शन हो रहे हैं. यह विधेयक चीन को प्रत्यर्पण की इजाजत देता है. सोमवार को हांगकांग को चीन को सौंपने की 22वीं सालगिरह के मौके पर कट्टरपंथी प्रदर्शनकारी जिनमें अधिकतर युवा थे, हांगकांग की ‘लेजिस्लेटिव काउंसिल’ में घुस गए थे.

इसी मसले को लेकर हांगकांग के प्रदर्शनकारियों ने चीन की गंभीर चेतावनी को दरकिनार करते हुए एक लाख से अधिक की संख्या में रविवार को लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारी काले पहनावे में थे. बारिश के बावजूद विक्टोरिया पार्क प्रदर्शनकारियों से भर गया, और उसके बाद भी लोगों के आने का सिलसिला जारी रहा. इस तरह पार्क के बाहर सभी सड़कें भी प्रदर्शनकारियों से भर गईं.

यह विरोध-प्रदर्शन एक प्रत्यर्पण विधेयक के खिलाफ शुरू हुआ है, जिसे हॉन्ग कॉन्ग सरकार ने निलंबित कर दिया है. रैली में शामिल होने जा रहे प्रदर्शनकारियों से सबवे रेलवे स्टेशन भर गए, जिसके बाद उन्हें बंद कर देना पड़ा. प्रशासन ने आयोजक सिविल ह्यूमन राइट फ्रंट को मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन पार्क में इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए कि वहां की सड़कें भी प्रदर्शनकारियों से भर गईं. पुलिस ने हालांकि विक्टोरिया पार्क में प्रदर्शन की अनुमति दी थी.

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