2019 के अंत तक ब्रिटेन में दौड़ेंगी ड्राइवरलेस कारें

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नई दिल्ली: ड्राइवरलेस कारों का सपना अब सपना नहीं रह जाएगा. जल्द ही इस सपने को साकार करने वाली है ब्रिटेन की सरकार. ब्रिटेन में सबसे पहले 11 अक्टूबर 2016 में इंग्लैण्ड के मिल्टन कीन्स शहर में पैदल चलने वाले ज़ोन में सबसे पहले ड्राइवरलेस कार का परीक्षण किया गया था.

ब्रिटेन के अधिकारियों का कहना है कि इंग्लैण्ड पूरे यूरोप में ऐसा परीक्षण करने वाला पहला देश बन जाएगा जो टेक्नोलॉजी में हमें बाकी देशों से आगे ले जाएगा लेकिन इस घोषणा के बाद से ही लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा हो गयी है क्योंकि पिछले साल ही अमेरिका में एक महिला की मौत ड्राइवरलेस कार द्वारा हो गई थी हालांकि ब्रिटेन के परिवहन विभाग ने ऐसा दावा किया है कि किसी भी कंपनी को कारों के परीक्षण की अनुमति देने से पहले एक सख्त आवेदन प्रक्रिया से गुजरना होगा जिसके बाद ही वे किसी कार का परीक्षण कर पाएंगे.

क्या होगी समस्या

पूरी दुनिया में कार कंपनियां ड्राइवरलेस कारों पर परीक्षण कर रही हैं जो एक क्रांतिकारी कदम है लेकिन इसके फायदों के साथ-साथ कई नुकसान भी हैं और उन्हीं में से एक समस्या कैलीफोर्निया यूनीवर्सिटी के रिसर्च में सामने आयी है. रिसर्च में यह दावा किया गया है कि ड्राइवरलेस कारों के आने के बाद पार्किंग की समस्या से तो छुटकारा मिल जाएगा लेकिन इससे ट्रैफिक की समस्या के बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि लोग कार को पार्किंग में न लगाकर क्रूज मोड में डाल देंगे.

क्या है क्रूज मोड

क्रूज कंट्रोल मोड वाहन की एक प्रणाली है जो किसी आॅटोमेटिकली किसी वाहन की गति को नियंत्रित करती है. चूंकि ड्राइवरलेस कार के मेंटेनस और कार के चलने के प्रति घंटे का खर्च छोटे शहरों की पार्किंग लागत से काफी कम होगा इसी वजह से लोग अपनी कारों को पार्किंग में लगाने की बजाए क्रूज मोड में रखेंगे.

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