सऊदी ऑइल प्‍लांट अटैक: ईरान ने US को दी युद्ध की धमकी, भारत पर तेल संकट का खतरा

सऊदी अरब में ऑइल प्‍लांट पर हमले के बाद से खाड़ी देशों में पैदा हुए तनाव के चलते भारत में भी तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है.

रियाद/तेहरान: सऊदी अरब में दुनिया के सबसे बड़े ऑइल प्लांट पर शनिवार को हुए ड्रोन विस्‍फोट के बाद ईरान के साथ टकराव चरम पर पहुंच गया है. सऊदी अरब स्थित ऑइल प्‍लांट पर हमले की जिम्‍मेदारी यमन स्थित शिया हूती विद्रोहियों ने ली है. अमेरिका इस हमले के लिए ईरान को जिम्‍मेदार ठहरा रहा है.

ईरान शिया देश है और उसका दावा है कि यमन के शिया संगठन ने ईरान के इशारे पर यह हमला किया है. अमेरिका की ओर से आरोप लगाए जाने के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए उसे पूर्ण युद्ध की धमकी तक दे डाली है.

सऊदी अरब में ऑइल प्‍लांट पर हमले के बाद से खाड़ी देशों में पैदा हुए तनाव के चलते तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है. यहां गौर करने वाली यह भी है कि जब से अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए हैं, तब से भारत तेल आयात के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर हो गया है. हालांकि, राहत की बात यह है कि सऊदी अरब ने ऑइल सप्‍लाई बहाल करने के लिए काफी तेजी से प्रयास शुरू कर दिए हैं.

ईरान ने क्‍या कहा?

सऊदी अरब में ड्रोन हमले के लिए जिम्‍मेदार ठहराए जाने पर ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह उसकी छवि खराब करने के लिए ऐसा कर रहा है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसावी ने कहा, ‘ऐसे निराधार और बिना सोचे-समझे लगाए गए आरोप समझ से परे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘अमेरिकियों की नीति ईरान पर दबाव बनाने की रही है, इसलिए वह झूठ बोल रहे हैं. धुर

इस टकराव पर ईरानी सेना के कमांडर ने तो अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह ‘पूर्ण युद्ध’ के लिए तैयार हैं. ईरानी सेना के कमांडर अमीरली हाजीजादेह ने कहा, ‘हर किसी को जानना चाहिए कि अमेरिका के सभी सैन्य अड्डे और एयरक्राफ्ट कैरियर ईरान मिसाइलों की जद में हैं.’

सऊदी अरब और ईरान के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है. पिछले 5 साल से सऊदी अरब और यमन में युद्ध जैसे हालात हैं. सऊदी के नेतृत्व में गठबंधन सेना यमन में हूती विद्रोहियों से लड़ रही है. हूती विद्रोही भी कई बार सऊदी अरब को निशाना बना चुके हैं. यही वजह है कि ड्रोन हमलों के बाद सऊदी और ईरान के बीच टकराव और बढ़ गया है. जहां तक अमेरिका की बात है तो वह सऊदी अरब का करीबी सहयोगी है और ईरान के साथ लंबे समय से उसका टकराव चल रहा है, इसलिए वह ईरान पर दबाव बनाने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहता है.