भारत और चीन की विकास दर पर टिकी है वैश्विक अर्थव्यवस्था, अमेरिका से डील जल्द: निर्मला सीतारमण

आईएमएफ में शनिवार को अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन न्यूकिन से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए सीतारमण ने कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार की बातचीत तेज़ी से आगे बढ़ रही है.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को उम्मीद है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में शनिवार को अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन न्यूकिन से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए सीतारमण ने कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार की बातचीत तेज़ी से आगे बढ़ रही है. जल्द ही इस बातचीत का नतीजा सबके सामने होगा.

सीतारमण ने कहा, ‘मैंने सचिव नुचिन के साथ मोटे तौर पर व्यापार का उल्लेख किया है. मगर इसपर वह वाणिज्य मंत्री और रॉबर्ट लाइटहाइजर (अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि) मिलकर काम कर रहे हैं. मेरे इनपुट्स के अनुसार बातचीत तेज़ गति से आगे बढ़ रही है और दोनों पक्षों के बीच जल्द ही डील पर सहमति बनने की संभावना है.’

सीतारमण ने कहा, ‘अमेरिकी वित्त मंत्री नवंबर की शुरुआत में भारत आ सकते हैं. इससे पहले ही हमारे बीच व्यापार समझौतों की कुछ शर्तों पर चर्चा हुई. हालांकि, अभी वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर इस पर बातचीत कर रहे हैं. मुझे जानकारी मिली है कि समझौते के लिए दोनों देश मजबूती से जुड़ रहे हैं.’

बता दें रविवार को निर्मला सीतारमण अमेरिका के शिकागो में कुछ उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगी. वे यहां भारतीय समुदाय से भी मिलेंगी.

वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सीतारमण ने कहा, ‘मैं काफी ज़िम्मेदारी से यह बात कह रही हूं कि IMF ने अगले एक सालों के लिए जो भी विकास दर तय किए हैं वो पूरी तरह से भारत और चीन की अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है. दूसरे शब्दों में कहें तो पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था इन दोनों देशों के विकास दर पर टिकी हुई है.’


पीटीआई की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक सीतारमण ने कहा है कि वह ऐसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खाका तैयार करेंगी जो चीन से आगे भारत को निवेश गंतव्य के रूप में देख रही हैं. उन्होंने कहा कि उद्योग जगत के ऐसे दिग्गज जो अपने कारोबार को चीन से बाहर ले जाना चाहते हैं, वे निश्चित रूप से भारत की ओर देख रहे हैं. वित्त मंत्री ने कहा, भारत के लिए जरूरी हो जाता है कि वह इन कंपनियों से मिले और उन्हें अपने यहां आमंत्रित करे.

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक में अपनी परिचर्चा के समापन पर भारतीय संवाददाताओं के समूह के साथ बातचीत में सीतारमण ने कहा, ‘निश्चित रूप में मैं ऐसा करूंगी. मैं ऐसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की पहचान करूंगी, सभी अमेरिकी कंपनियों या किसी अन्य यूरोपीय देश की कंपनी या ब्रिटिश कंपनी जो चीन से निकलना चाहती है, मैं उनसे संपर्क करूंगी और भारत को निवेश के तरजीही गंतव्य के रूप में पेश करूंगी.’

उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय सिर्फ अमेरिका और चीन के बीच जो चल रहा है सिर्फ उसी पर आधारित नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘इससे या तो स्थिति और खराब या किसी स्तर पर यह प्रभावित करेगा. लेकिन तथ्य यह है कि कंपनियों इसके अलावा भी कई और वजहों से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित होना चाहती हैं.’ वित्त मंत्री ने कहा कि भारत कंपनियों को देश के बाजार का लाभ लेने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र बनाना चाहता है.

उन्होंने कहा, यह बात साफ है कि कंपनियों के लिए भारत ऐसा विकल्प है जिसपर वे विचार करेंगी. सीतारमण ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि वियतनाम उतना आकर्षक नहीं है. ‘मेरी आज कुछ बैंकों और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ भी बात हुई. उनका मानना है कि अब वियतनाम का संकुचन हो रहा है. उसके पास विस्तार के निवेश कार्यक्रमों के लिए श्रमबल की कमी है.’