‘पाकिस्तान पर कसेगी आर्थिक नकेल’, आतंकवादियों पर नहीं लिया ऐक्शन, FATF रिपोर्ट में खुलासा

आतंकी फंडिंग रोकने में विफल रहने की वजह से पिछले साल यानी 2018 में पाकिस्तान को FATF की 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया था.

पाकिस्तान की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीने जाने को लेकर पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान अंतर्राष्ट्रीय नजरअंदाज़ी भूले भी नहीं थे कि अब FATF (फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स) की रडार में आ गए हैं.

दरअसल टेरर फंडिंग पर अंतर्राष्ट्रीय निगेहबानी करने वाली संस्था FATF के एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ने कहा है पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सिक्यॉरिटी काउंसिल रेज़ोल्यूशन 1267 को लागू करने के लिए सही कदम नहीं उठाए.

ग्रुप का कहना है कि पाकिस्तान ने यूएन द्वारा प्रतिबंधिंत आतंकवादियों, हाफिज सईद, मसूर अजहर और एलईटी, जेयूडी व आफआईएफ जैसे आतंकी संगठनों को लेकर नरमी बरती और ठोस ऐक्शन नहीं लिया.

पाक ने जून 2018 में FATF से ऐंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग मैकेनिजम को मजबूत बनाने के लिए उसके साथ काम करने का वादा किया था. लेकिन ऐशिया एशिया पैसिफिक की इस नई रिपोर्ट से पाकिस्तान के झूठ की पोल खुल गई है.

म्युचुअल इवैल्युएशन रिपोर्ट ऑफ पाकिस्तान में APG ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के साथ-साथ वहां सक्रिय आतंकी संगठनों से पैदा होने वाले खतरों को पहचाने, आकलन करे और फिर समझे.

ज़ाहिर है कि 13 से 18 अक्टूबर के बीच FATF की पेरिस में बैठक होने वाली है. जहां टेरर फंडिंग मामले में पाकिस्तान पर फ़ैसला लिया जाएगा. ऐसे में एशिया पैसिफिक ग्रुप की नई रिपोर्ट से पाकिस्तान को तगड़ा झटका लग सकता है. इस रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान पर ब्लैक लिस्टेड होने का ख़तरा दोगुना हो गया है.

आतंकी फंडिंग रोकने में विफल रहने की वजह से पिछले साल यानी 2018 में पाकिस्तान को FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया था. इससे पहले वह साल 2012 से 2015 तक ग्रे लिस्ट में रहा था. उस वक्त पाकिस्तान ने 15 महीने का ऐक्शन प्लान रखा, जिसमें उसने बताया कि टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए उन्होंने क्या-क्या उपाय किए हैं.

FATF क्या है?
FATF पेरिस स्थित अंतर-सरकारी संस्था है. FATF सभी देशों पर नज़र रखता है और आतंकी गतिविधियों या मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाले देशों को दी जाने वाली आर्थिक मदद को रोकने के लिए नियम बनाता है. इसका गठन 1989 में किया गया था. FATF की ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है.