Finland Air Force ने बंद किया स्वास्तिक चिन्ह का इस्तेमाल, जानिए क्या है इसकी वजह

इस बारे में फिनिश वायु सेना (Finnish Air Force) का कहना है कि वॉन रोसेन का प्रतीक होने के नाते स्वास्तिक (Swastika) कुछ वायु सेना यूनिट के झंडो में बना हुआ है. हालांकि यह अब सेंट्रल वायु सेना कमांड में इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
Swastika in Finland Air Force, Finland Air Force ने बंद किया स्वास्तिक चिन्ह का इस्तेमाल, जानिए क्या है इसकी वजह

फिनलैंड की वायु सेना (Finland Air Force) ने शांतिपूर्वक तरीके से चुपचाप स्वास्तिक चिन्ह का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है. इसे पहली बार हेलसिंकी शैक्षणिक तीवो टेविनेन विश्वविद्यालय ने नोटिस किया था. दरअसल, स्वास्तिक चिन्ह (Swastika) को हमेशा से नाजी जर्मनी और उसके अपराधों का प्रतीक माना गया है. वायु सेना से यह सवाल किया गया था कि क्या प्रतीक का लगातार इस्तेमाल फिनिश सशस्त्र बलों के लिए सहायक था.

हजारों साल पुराना है स्वास्तिक का इतिहास

बता दें कि इसे प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध से पहले नाजी जर्मनी (Nazi Germany) की नाजी पार्टी ने अपनाया था. स्वास्तिक 11 हजार सालों से भी पुराना है और पश्चिमी और मध्य-पूर्वी सभ्यताओं तक इसके प्रसार का पता चलता है. फिनलैंड की वायुसेना (Finnish Air Force) में स्वास्तिक चिन्ह के इस्तेमाल की शुरुआत 1918 में राज्य चिन्ह के तौर पर हुई थी. उसके तुरंत बाद नाज़ीवाद ने यूरोप को तबाह कर दिया था और देश एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया था.

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माना जाता है अच्छी तकदीर का प्रतीक

हजारों सालों से फिनलैंड में स्वास्तिक को एक अच्छी तकदीर का चिन्ह माना जाता रहा है. यहां तक कि ‘स्वास्तिक के सीधे खड़े’ रूप को सदियों से गहनों और कपड़ों पर भी इस्तेमाल किया जाता रहा है.

देखते ही देखते इस चिन्ह ने नाज़ियों के लाल रंग वाले झंडे में भी जगह ले ली और 20वीं सदी के अंत तक इसे नफरत की नज़र से देखा जाने लगा. नाज़ियों द्वारा कराए गए यहूदियों के नरसंहार में बचे फ़्रेडी नॉलर कहते हैं, “स्वास्तिक चिन्ह यहूदी लोगों के लिए भय और दमन का प्रतीक बन गया था.” युद्ध ख़त्म होने के बाद जर्मनी में इस चिह्न के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और 2007 में जर्मनी ने यूरोप भर में इस पर प्रतिबंध लगवाने की नाकाम पहल की थी.

वॉन रोसेन के जरिए जोड़ा गया था फिनिश वायु सेना से

यह चिन्ह एक स्वीडिश रईस जिसे काउंट एरिक वॉन रोसेन (Count Eric von Rosen) कहा जाता है के जरिए फिनिश वायु सेना से जोड़ा गया था. वह स्वास्तिक को व्यक्तिगत सौभाग्य का प्रतीक मानते थे. जब उन्होंने 1918 में स्वीडन के नए स्वतंत्र पड़ोसी राष्ट्र फिनलैंड की वायु सेना को एक विमान भेंट किया, तो उस पर नीले रंग का स्वस्तिक बना था.

यह थुलिन टाइप डी फ़िनिश वायु सेना का पहला विमान था और इसके बाद के सभी विमानों में 1945 तक उनके नीले स्वास्तिक चिन्ह का इस्तेमाल होता रहा. इस चिन्ह के इस्तेमाल के समर्थकों का कहना है कि 1918 में नाज़ी नहीं थे, इसलिए वायु सेना में स्वस्तिक के इस्तेमाल का नाज़ीवाद से कोई लेना-देना नहीं है.

2018 में फिनिश वायुसेना की 100वीं वर्षगांठ की एयर शो में इस चिन्ह का प्रदर्शन किया गया. इस बारे में फिनिश वायु सेना का कहना है कि वॉन रोसेन का प्रतीक होने के नाते स्वास्तिक कुछ वायु सेना यूनिट के झंडो में बना हुआ है. हालांकि यह अब सेंट्रल वायु सेना कमांड में इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

क्या है स्वास्तिक चिन्ह

स्वास्तिक में दो सीधी रेखाएं होती हैं जो एक दूसरे को काटती हैं. ये रेखाएं आगे चलकर मुड़ जाती हैं. इसके बाद ये रेखाएं अपने सिरों पर थोड़ी और आगे की तरफ मुड़ी हुई होती हैं. स्वास्तिक की यह आकृति दो प्रकार की हो सकती है. पहला स्वास्तिक, जिसमें रेखाएं आगे की ओर होती हुईं हमारे दायीं ओर मुड़ती हैं, जिसे  ‘स्वास्तिक’ कहते हैं. यही शुभ चिह्न है जो प्रगति का प्रतीक माना जाता है.

दूसरी आकृति में रेखाएं पीछे की ओर होती हुईं हमारे बायीं ओर मुड़ती हैं. इसे ‘वामावर्त स्वास्तिक’ कहते हैं. भारतीय संस्कृति में इसे अशुभ माना जाता है. जर्मनी के तानाशाह हिटलर के झंडे में यही ‘वामावर्त स्वास्तिक’ इस्तेमाल किया गया था.

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