ईरान की जमकरान मस्जिद पर पहली बार फहराया लाल झंडा, युद्ध और बलिदान की देता है चेतावनी

यह झंडा शाहिद कासिम सुलेमानी के सम्मान में लहराया गया है, हालांकि यह शोक के प्रतीक के तौर पर नहीं देखा जाता है.
Red Flag Unfurled Over The Holy Dome Of Jamkarān Mosque Qom Iran, ईरान की जमकरान मस्जिद पर पहली बार फहराया लाल झंडा, युद्ध और बलिदान की देता है चेतावनी

ईरान के अधिकारियों ने शनिवार को कोम में जमकरान मस्जिद के पवित्र गुंबद पर हुसैन का लाल झंडा फहराया है. लाल झंडे का फहराना एक सटीक संकेत देता है कि एक बड़ा युद्ध होने वाला है या अभी भी चल रहा है. अब तक की रिपोर्टों से पता चला है कि यह पहली बार है जब ईरान ने इस झंडे को फहराया है, यह झंडा धार्मिक प्रतीकों से जुड़ा हुआ है. इस्लामिक सिद्धांतों के मुताबिक लाल झंडा फहराए जाने का मतलब युद्ध की घोषणा होता है.

यह झंडा शाहिद कासिम सुलेमानी के सम्मान में लहराया गया है, हालांकि यह शोक के प्रतीक के तौर पर नहीं देखा जाता है. यह झंडा संकेत देता है कि ईरान अपने पूरे समाज को एक ऐसे संघर्ष की ओर ले जा रहा है जो पहले कभी नहीं देखा गया. इस बात को ध्यान में रखें कि ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी यह झंडा फहराया नहीं गया था.

मस्जिद के ऊपर फहराया गया हुसैन का लाल झंडा, कर्बला के ऐतिहासिक युद्ध की ताकत का प्रतीक है. साथ ही लाल रंग को बलिदान और खून का प्रतीक माना जाता है. इस मस्जिद को ईरान में सबसे महत्वपूर्ण मस्जिद माना जाता है.

मालूम हो कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को शुक्रवार को बताया था कि वह अमेरिका द्वारा ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी को मारने के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार को सुरक्षित रखता है.

इरान की रेवोल्यूसनरी गार्ड कार्प्स ने एक और रॉकेट हमला किया है, जिसके दौरान इराक के बलदाद को निशाना बनाया गया. यहां अमेरिकी सेना भी मौजूद है.

अमेरिकी दूतावास पर दागे गए रॉकेट

झंडा फहराए जाने के बाद बलाद में अमेरिकी दूतावास और एयरबेस पर मिसाइल से हमले किए गए हैं. चार रॉकेट बलाद में दागे गए हैं, जिसमें 3 नागरिकों को चोटें आई हैं. हालांकि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ है, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है.

बगदाद के ग्रीन जोन में में इस्लामिक रेवोल्युसनरी गार्ड कॉर्प्स ने 107mm और 122mm के अनगाइडेट रॉकेट दागे, जिसने अमेरिकी दूतावास के कुछ दूरी पर हिट किया. फिलहाल अमेरिकी दूतावास को बंद कर दिया गया है और इसके कर्मचारियों को शेल्टर में ट्रांसफर कर दिया गया है.

IRGC के समर्थन वाली कातिब हिजबुल्लाह की 45वीं ब्रिगेड ने ऐलान किया है कि ईराकी सेना, खुद को अमेरिकी दलों से 1 किलोमीटर की दूरी पर रखे, क्योंकि वह रविवार शाम ईराक स्थित अमेरिकी बेसों पर हमले करेगा.

अमेरिका ने सुलेमानी को माना 603 अमेरिकी सैनिकों की मौत का जिम्मेदार

अमेरिकी विदेश विभाग ने ट्वीट कर कहा है कि ‘कासिम सुलेमानी कम से कम 603 अमेरिकी सैनिक और इराक में हजारों लोगों की हत्या करने के लिए जिम्मेदार था. 2003 से 2011 के बीच इराक में अमेरिकी कर्मियों की 17 प्रतिशत मौतें इस आतंकवादी और उसके इस्लामिक रिपब्लिकन गार्ड फोर्स का जिम्मेदार भी वो ही हो सकते हैं.’

अमेरिकी विदेश विभाग ने ट्वीट कर कहा, “कासिम सुलेमानी और अबू महदी अल-मुहांदिस शांतिपूर्ण इराकी प्रदर्शनकारियों की हत्या के लिए जिम्मेदार थे, जिन्होंने भ्रष्टाचार और ईरानी शासन की इराकी मामलों में मध्यस्थता पर आपत्ति जताई थी. यही कारण है कि साधारण ईराकवासी उनके निधन पर शोक नहीं मना रहे हैं, बल्कि जश्न मना रहे हैं.”

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