जम्मू-कश्मीर मसले पर फ्रांस भी भारत के साथ, राष्ट्रपति मैक्रों बोले- कोई तीसरा देश ना दे दखल

राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि मैं कुछ दिनों बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी बात करूंगा और उनसे कहूंगा कि वार्ता द्विपक्षीय होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस पहुंचे हैं. इस दौरान पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. बैठक के बाद दोनों नेताओं ने साझा बयान दिया. राष्ट्रपति मैक्रों ने कश्मीर मुद्दों पर कहा कि किसी भी देश को इसमें मध्यस्थता नहीं करनी चाहिए. इस पर सिर्फ भारत और पाकिस्तान मिलकर ही नतीजा निकाल सकते हैं.

‘तीसरे पक्ष को नहीं करना चाहिए हस्तक्षेप’ 
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें जम्मू-कश्मीर पर भारत द्वारा लिए गए हाल के फैसले से अवगत कराया और यह भी बताया कि यह भारत की संप्रभुता से जुड़ा है. मैंने उनसे कहा कि भारत और पाकिस्तान को इस मुद्दे का समाधान निकालना होगा और किसी तीसरे पक्ष को इस क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए या हिंसा को भड़काना नहीं चाहिए.”

उन्होंने कहा कि मैं कुछ दिनों बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी बात करूंगा और उनसे कहूंगा कि वार्ता द्विपक्षीय होनी चाहिए. हम चाहते हैं कि कहीं कोई आतंकवाद की घटना नहीं हो.

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ महीने पहले ही एक बार फिर से चुनाव जीतकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता बने. मैं आपको बधाई देता हूं. इससे पता चलता है कि भारत का लोकतंत्र कितना मजबूत है. हमने जी-7 के बारे में कई बातें कहीं. मैं चाहता था कि इसमें भारत भागीदार हो.”

उन्होंने कहा कि ‘मैंने जी-7 के तरीकों को कुछ बदला है. मैं चाहता था कि जी 7 में हम कई अहम मुद्दों पर चर्चा करें. इसमें क्लाइमेट चेंज पर भी चर्चा करने का हमने फैसला किया था. हम इन मुद्दों पर भारत के बिना बात नहीं कर सकते थे.’

‘स्वार्थ पर नहीं टिका है भारत-फ्रांस रिश्ता’
राष्ट्रपति मैक्रों के बयान के बाद पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच दोस्ती किसी स्वार्थ पर नहीं टिकी है, बल्कि यह स्वतंत्रता, समानता और भाइचारे के ठोस सिद्धांतों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि दोनों देश लगातार आतंकवाद का सामना कर रहे हैं. हमारा इरादा आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को व्यापक बनाना है.

पीएम मोदी ने कहा, “फ्रांस और भारत जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और प्रौद्योगिकी समावेशी विकास की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ खड़े हैं. हम सब मिलकर एक सुरक्षित और समृद्ध दुनिया का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं.”

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