पाकिस्तान जब तक PoK से आर्मी वापस नहीं बुलाता, तब तक जारी रहेगा प्रतिरोध: सज्जाद राजा

सज्जाद राजा (Sajjad Raja) ने ट्वीट किया, “पाकिस्तान ने 22 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर पर हमला किया और इसका बंटवारा कर दिया. लेकिन हमारा प्रतिरोध तब तक जारी रहेगा जब तक कि पाकिस्तान अपनी सेना और सभी नागरिकों को हमारे राज्य से वापस बुलाने के लिए मजबूर नहीं हो जाता.”

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:17 pm, Sun, 18 October 20

गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) के नेता और कार्यकर्ता सज्जाद राजा (Sajjad Raja) ने 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान (Pakistan) द्वारा जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) पर किए आक्रमण को याद किया. साथ ही उन्होंने इस दिन को ‘प्रतिरोध दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया गया. सज्जाद राजा ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिरोध तब तक जारी रहेगा जब तक कि वो अपनी सेना का इस इलाके से वापस नहीं बुला लेता.

सज्जाद राजा ने ट्वीट किया, “22 अक्टूबर को हमें ‘प्रतिरोध दिवस’ के रूप में मनाना चाहिए. पाकिस्तान ने 22 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर पर हमला किया और इसका बंटवारा कर दिया. लेकिन हमारा प्रतिरोध तब तक जारी रहेगा जब तक कि पाकिस्तान अपनी सेना और सभी नागरिकों को हमारे राज्य से वापस बुलाने के लिए मजबूर नहीं हो जाता. पाकिस्तान को कब्जे को एक बड़ी सी ना है.”

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“जम्मू-कश्मीर के इतिहास का ‘सबसे काला दिन'”

दक्षिण एशियाई अध्ययन के लिए यूरोपीय फाउंडेशन (EFSAS) ने हाल ही में 22 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के इतिहास का ‘सबसे काला दिन’ बताया था. इसी दिन क्षेत्र को जब्त करने के लिए एक ऑपरेशन गुलमर्ग शुरू किया गया था.

“35,000 से 40,000 के बीच निवासी मारे गए”

यूरोपियन थिंक टैंक के मुताबिक, जनजातीय आक्रमण में 35,000 से 40,000 के बीच निवासी मारे गए. साथ ही जम्मू-कश्मीर के भाग्य पर ‘गंभीर निशान’ बना दिया गया.

“…जम्मू-कश्मीर के लोगों के सबसे बड़े दुश्मन”

यूरोपियन थिंक टैंक ने कहा, “इस बात में कोई शक नहीं है कि जनजातीय आक्रमण के नीति-निर्धारक और अपराधी ही जम्मू-कश्मीर के लोगों के सबसे बड़े दुश्मन थे और हैं. 22 अक्टूबर 1947 यानी आक्रमण का यह दिन जम्मू-कश्मीर के इतिहास का सबसे काला दिन है.”

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