श्रीलंका के नए राष्ट्रपति गोताबेया राजपक्षे की चीन से नजदीकियां, भारत की बढ़ सकती है मुसीबतें

गोताबेया के बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में श्रीलंका ने चीन में खूब निवेश किया था. 2014 में राजपक्षे ने दो चीनी सबमरीन को उनके वहां खड़ा करने की इजाजत तक दी थी.
gotabaya rajapaksa, श्रीलंका के नए राष्ट्रपति गोताबेया राजपक्षे की चीन से नजदीकियां, भारत की बढ़ सकती है मुसीबतें

गोताबेया राजपक्षे (gotabaya rajapaksa) सोमवार को श्रीलंका के प्राचीन बौद्ध शहर अनुराधापुरा में देश के 17वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण कर रहे हैं. उन्होंने 16 नवंबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज की है. श्रीलंका के पोडुजना पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के उम्मीदवार राजपक्षे ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज की, और रविवार को उन्हें राष्ट्रपति घोषित किया गया.

चुनाव जीतने के बाद गोताबेया राजपक्षे (gotabaya rajapaksa) ने कहा, “जैसा कि हम श्रीलंका के एक नए सफर की शुरुआत करने जा रहे हैं, हमें यह याद रखना होगा कि सभी श्रीलंका वासी इस सफर का हिस्सा हैं.”

ट्वीट के जरिए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने का मौका पाकर वह आभारी है, न सिर्फ उनके लिए जिन्होंने उन्हें वोट दिया, बल्कि एक राष्ट्रपति के तौर पर सभी श्रीलंका वासियों के प्रति भी आभारी हैं.

एसएलपीपी ने बताया कि शपथ ग्रहण करने के बाद राजपक्षे पहले श्रीलंका के जया श्री महाबोधि और रुवानवेलिसेया जाकर आशीर्वाद लेंगे.

चीन से गोताबेया (gotabaya rajapaksa) की नज़दीकियां

माना जाता है कि उनका झुकाव चीन की ओर अधिक है. गोताबेया (gotabaya rajapaksa) के भाई के शासन में चीन ने बड़े पैमाने पर श्रीलंका की आधारभूत परियोजनाओं में निवेश किया था. महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहते चीन और लंका करीब आए थे.  2014 में राजपक्षे ने दो चीनी सबमरीन को उनके वहां खड़ा करने की इजाजत तक दी थी.

अब उनके भाई गोताबेया के जीतने के बाद श्रीलंका और चीन की नजदीकियां फिर बढ़ सकती हैं.

इस स्थिति में चीन हिंद महासागर पर अपनी पकड़ ज्यादा मजबूत कर सकता है. चीन लंबे वक्त से इसकी कोशिशों में लगा है.

राजनीतिक जानकार मानते हैं की राजपक्षे की जीत के बाद चीन की स्थिति मज़बूत होगी. इससे पहले गोताबेया (gotabaya rajapaksa) के बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में श्रीलंका ने चीन में खूब निवेश किया था.

महिंदा राजपक्षे 2005 तक सत्ता में रहे थे. इस दौरान उन्होंने टीन से अरबों डॉलर उधार भी लिए थे. इसके बदले में कोलंबो बंदरगाह के द्वार चीन के लिए खोले गए थे. माना जा रहा है कि राजपक्षे की जीत के बाद भारत-चीन के रिश्ते भी बदलेंगे. हालांकि पीएम मोदी ने उन्हें जीतने पर बधाई दी है.

Related Posts