विदेशी स्टूडेंट्स वीजा मामले में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कोर्ट पहुंचे हार्वर्ड-MIT, फैसले को बताया गैरकानूनी

यूनिवर्सिटीज ने कहा कि उन्होंने मार्च से डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (Department of Homeland Security) की नीति पर भरोसा किया है, जिससे अमेरिका में विदेशी छात्रों (Foreign Students) को रहने और नए छात्रों को यहां आने की अनुमति मिल सके.
Harvard MIT sue trump administration, विदेशी स्टूडेंट्स वीजा मामले में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कोर्ट पहुंचे हार्वर्ड-MIT, फैसले को बताया गैरकानूनी

विदेशी स्टूडेंट्स के वीजा (Foreign Students Visa) का मामला ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Massachusetts Institute of Technology-MIT) ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर किया है. यह मुकदमा ट्रंप प्रशासन के उस फैसले के खिलाफ किया गया है, जिसमें कहा गया कि अगर कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण कोर्सेज पूरी तरह से ऑनलाइन हो जाते विदेशी छात्रों का वीजा नहीं मिलेगा और उन्हें डिपोर्ट कर दिया जाएगा.

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हार्वर्ड और एमआईटी ने फेडरल कोर्ट से कहा है कि ट्रंप प्रशासन को अंतरराष्ट्रीय छात्रों के उन कोर्सेज में डिपोर्ट करने के आदेश को रोकना चाहिए जो कोरोनावायरस संकट के कारण ऑनलाइन हो जाएंगे. यूनिवर्सिटीज की ओर से बोस्टन में अमेरिकी डिस्ट्रिक्‍ट कोर्ट में बुधवार को दायर मामले में 6 जुलाई के सरकारी आदेश को दरकिनार करने का अनुरोध किया गया है.

याचिका में ट्रंप प्रशासन के आदेश को गैर-कानूनी भी बताया गया है. एक अस्थायी प्रतिबंध आदेश 14 दिनों के लिए इमिग्रेशन एंड कस्टम एनफोर्समेंट ((US Immigration and Customs Enforcement) पॉलिसी को रोक देगा. कोर्ट के पेपर्स में यूनिवर्सिटीज ने कहा कि उन्होंने मार्च से डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की नीति पर भरोसा किया है, जिससे अमेरिका में विदेशी छात्रों को रहने और नए छात्रों को यहां आने की अनुमति मिल सके.

अमेरिका ने किया था ये ऐलान

संयुक्त राज्य अमेरिका ने सोमवार को कहा था कि अगर कोरोनावायरस के कारण विदेशी छात्रों की क्लासेज ऑनलाइन हो जाती हैं तो उन्हें देश में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इन विदेशी छात्रों को हर सेमेस्टर के लिए वीजा नहीं मिलेगा.

यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने अपने बयान में कहा कि नॉनइमिग्रेडेंट F-1 और M-1 छात्रों की क्लासेज अगर पूरी तरह से ऑनलाइन संचालित होती हैं तो उन्हें अमेरिका में रहने की जरूरत नहीं है. ICE के अनुसार, FE-1 के छात्र एकेडमिक कोर्स और M-1 स्टूडेंट वोकेशनल कोर्स करते हैं.

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