Hong Kong:एयरपोर्ट में घुसे हजारों प्रदर्शनकारी, पढ़ें चीन के खिलाफ खुली बगावत के Facts

1997 में हॉन्‍ग कॉन्‍ग ब्रिटिश हाथों से निकलकर चीन के साथ मिल गया. चीन ने उस वक्‍त वादा किया वह हॉन्‍ग कॉन्‍ग की स्‍वायत्‍ता हमेशा बरकरार रखेगा, लेकिन अब यहां आक्रोश पनप रहा है.

हॉन्‍ग कॉन्‍ग में चीन की कम्‍युनिस्‍ट सरकार के खिलाफ विरोध बढ़ता ही जा रहा है. सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी हॉन्‍ग कॉन्‍ग एयरपोर्ट में घुस गए. इसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी को विमानों का परिचालन रद्द करना पड़ा. एयरपोर्ट के अधिकारियों ने कहा, ‘दूसरे स्थानों से हॉन्‍गकॉन्‍ग रवाना हो चुकी उड़ानों के अलावा यहां से टेक-ऑफ करने वाली उड़ानों को रद्द किया जाता है.’

सोमवार को लोकतंत्र समर्थक हजारों प्रदर्शनकारी अपने हाथों में ‘हॉन्‍ग कॉन्‍ग सुरक्षित नहीं है और ‘पुलिस बल शर्म करो जैसी तख्तियां लेकर हवाई अड्डा पहुंच गए.

हॉन्‍ग कॉन्‍ग में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों को लेकर चीन वैश्विक स्‍तर पर अकेला पड़ता दिखाई दे रहा है. बौखलाए चीन ने ब्रिटेन से कहा है कि वह इस मामले में दखल न दे. हालांकि, ब्रिटेन ने चीन की ‘धमकी’ नजरअंदाज कर दिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक रॉब ने 9 अगस्त को हॉन्‍ग कॉन्‍ग की स्थिति को लेकर वहां के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के चीफ एडमिनिस्‍ट्रेटर कैरी लैम से फोन पर बात की.

दूसरी ओर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हॉन्‍ग कॉन्‍ग, चीन लोक गणराज्य का विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है और अब यह ब्रिटेन का उपनिवेश नहीं है. ऐसे में उसे हॉन्‍ग कॉन्‍ग के मामले में हस्‍तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.

-हॉन्‍ग कॉन्‍ग 150 साल तक ब्रिटेन का उपनिवेश रहा. 1842 के युद्ध के बाद हॉन्‍ग कॉन्‍ग में ब्रिटिश शासन स्‍थापित हुआ.

-1997 में हॉन्‍ग कॉन्‍ग ब्रिटिश हाथों से निकलकर चीन के साथ मिल गया. चीन ने उस वक्‍त वादा किया वह हॉन्‍ग कॉन्‍ग की स्‍वायत्‍ता हमेशा बरकरार रखेगा, लेकिन अब हॉन्‍ग कॉन्‍ग के लोगों को लगता है कि चीन की उनकी आजादी पर अंकुश लगा रहा है.

-यूं तो हॉन्‍ग कॉन्‍ग में लंबे समय से लोकतंत्र के समर्थन में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन मौजूदा आंदोलन एक विधेयक के विरोध में चल रहा है. इस विधेयक में प्रावधान है कि
हॉन्‍ग कॉन्‍ग का कोई नागरिक अगर अपराध करता है तो उस पर चीन में मुकदमा चलाया जा सकता है.

-मौजूदा प्रदर्शन चीन के लिए बड़ी चिंता का सबब इसलिए भी बन गए हैं, क्‍योंकि इनमें न केवल आम लोग बल्कि सिविल सर्वेंट भी कूद गए हैं.

-हॉन्‍ग कॉन्‍ग में विरोध प्रदर्शनों से चीन काफी बौखला गया है. वह विरोध के पीछे अमेरिका तक का हाथ बता चुका है.

-हॉन्‍ग कॉन्‍ग के लोग चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग की सख्‍त नीति से बेहद खफा हैं. उनका मानना है कि जबसे जिनपिंग सत्‍ता में आए हैं, तभी से उनके अधिकारों में कटौती का कोई न कोई प्रपंच रचा जा रहा है.

-2015 में हॉन्‍ग कॉन्‍ग के कई बुक सेलर्स को नजरबंद कर दिया गया था.

-हॉन्‍ग कॉन्‍ग प्रशासन (चीन समर्थित) फिलहाल प्रत्यर्पण कानून पर अड़ा हुआ है.