यमन में जुल्‍म सह रहे भारतीय मछुआरों की दिलेरी, सुल्‍तान की नाव चुराई और भाग निकले

ये मछुआरे यमन के एक सुल्‍तान के यहां काम करते थे. वहां उन्‍हें बंधुआ मजदूरों की तरह रखा जाता था.
Indian Fishermen Escape from Yemen, यमन में जुल्‍म सह रहे भारतीय मछुआरों की दिलेरी, सुल्‍तान की नाव चुराई और भाग निकले

यमन में एक सुल्‍तान की कैद से नौ भारतीय मछुआरे भाग निकले हैं. 19 नवंबर को उन्‍होंने अपने मालिक की नाव चुराई और कोच्चि के लिए रवाना हुए. खुले समुद्र में 3 हजार किलोमीटर से ज्‍यादा की दूरी तय करनी है. नाव से आखिरी संपर्क बुधवार को हुआ था, तब वे लक्षद्वीप के पास थे. इनमें से सात मछुआरे तमिलनाडु से और दो केरल से हैं.

कोस्‍ट गार्ड के सूत्रों के हवाले से टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि उन्‍होंने कोच्चि और कल्‍पेनी के बीच वैसी ही एक नाव देखी है. यह जगह कोच्चि के पश्चिम में करीब 218 किलोमीटर दूर है. मछुआरों के दक्षिण एशियाई संगठन के मुताबिक, भारतीय मछुआरों के भागकर इतना लंबा सफर करने का यह पहला वाकया है.

कोल्‍हू के बैल की तरह लिया जाता था काम

परिजनों के मुताबिक, ये मछुआरे एक सुल्‍तान के लिए काम करते थे. वो उन्‍हें पूरा पैसा नहीं देता था और बंधुआ मजदूरों की तरह रखता था. बिना आराम दिए काम कराता था. कई दिन तो ऐसे गुजरे जब सिर्फ एक बार खाना मिला.

उन्‍होंने सुल्‍तान से छोड़ देने की भीख मांगी थी मगर वो नहीं पसीजा. तब चोरी की नाव में भाग निकलना ही उन्‍हें इकलौता रास्‍ता सूझा. 19 नवंबर को तीन नावों में मछलियां पकड़ते समय उन्‍होंने एक नाव चुराई और कोच्चि के लिए निकल पड़े. उसी दिन एक मछुआरे ने अपनी मां को फोन किया था. एक और मछुआरे ने लक्षद्वीप पहुंच अपनी पत्‍नी को फोन लगाया.

सरकार से अपील, सख्‍ती ना करें

इन मछुआरों के परिजनों ने सरकार से उनका पता लगाने की गुहार लगाई है. सरकार से अपील की गई है कि जब वे बिना वैध दस्‍तावेजों के विदेशी नाव पर भारत की जल सीमा में घुसें तो उन्‍हें हिरासत में ना लिया जाए. उन्‍हें खाना-पानी दिया जाए.

सामान्‍य नाव के जरिए लक्षद्वीप से कोच्चि पहुंचने में 24 से 36 घंटे लगते हैं. कोस्‍ट गार्ड ने कहा है कि वह समुद्र में नाव की तलाश करेंगे.

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