बाल मजदूरी के खिलाफ पारित हुआ ILO कन्वेंशन-182, कैलाश सत्यार्थी ने निभाई अहम भूमिका

कन्‍वेंशन का समर्थन करते हुए इस पर हस्ताक्षर करने वाला देश बाल श्रम को खत्‍म करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दर्शाता है. साइन करने वाला हर देश अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसके लिए बाध्य हो जाता है कि वह अपनी राष्ट्रीय नीतियों और व्‍यवहारों को कन्‍वेंशन की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाएगा.
ILO Convention-182 passed against child labor, बाल मजदूरी के खिलाफ पारित हुआ ILO कन्वेंशन-182, कैलाश सत्यार्थी ने निभाई अहम भूमिका

बाल मजदूरी के खिलाफ आज ऐतिहासिक दिन है. दरअसल बाल श्रम के सबसे बदतर प्रकारों को खत्‍म करने के लिए बनाए गए इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन (ILO) के कन्वेंशन-182 को अब इसके सभी सदस्य देशों ने स्वीकार कर लिया है. दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित टोंगा ILO का 187वां और आखिरी सदस्य देश है, जिसने इस पर हस्ताक्षार कर ILO कनवेंशन-182 को स्वीकार कर लिया है.

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टोंगा के हस्ताक्षर के बाद कन्वेंशन-182 ILO के इतिहास में वैश्विक स्‍तर पर सबसे अधिक समर्थन वाला कन्‍वेंशन हो गया है. गौरतलब है कि यह ILO कन्वेंशन-182 नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के प्रयास से करीब 22 साल पहले सर्वसम्‍मति से पारित किया था. तब ILO के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी प्रस्ताव को उसके सभी सदस्य देशों का समर्थन मिला हो. भारत के लिए आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इस अंतरराष्ट्रीय कानून की मांग भारत की धरती से ही उठी थी.

शुरुआत हुई थी ‘ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर’ से

“ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर” की स्थापना करने वाले कैलाश सत्यार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार ILO कन्वेंशन-182 के लिए आवाज उठा रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप इसे आखिरकार स्वीकार कर लिया गया. इसका आगाज हुआ था साल 1998 में, जब बाल मजदूरी के खिलाफ कानून की मांग करते हुए सत्यार्थी ने ‘‘ग्‍लोबल मार्च अगेंस्‍ट चाइल्‍ड लेबर’’ के बैनरतले एक विश्वव्यापी यात्रा का आयोजन किया था.

इस यात्रा के जरिये बाल श्रम को खत्‍म करने के लिए 70 लाख से ज्यादा लोगों को एकजुट किया था. इस मार्च ने एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, यूरोप सहित 103 देशों की यात्रा करते हुए 80,000 से अधिक किलोमीटर की दूरी तय की थी. मार्च में भाग ले रहे यात्रियों ने “डाउन डाउन-चाइल्ड लेबर” और ‘‘वी वांट एडूकेशन’’ के नारे इस मार्च का अहम हिस्सा थे. इस यात्रा में तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष और राजा-रानी से लेकर वैश्विक नेताओं और जानेमाने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

साल 1999 में मिली थी पहली सफलता

ग्‍लोबल मार्च में सत्यार्थी के नेतृत्व में पूर्व बाल मजदूरों ने हिस्सा लिया और ILO के जिनेवा के 86वें सम्मेलन में बाल श्रम के सबसे बदतर प्रकारों के खिलाफ एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने का आह्वान किया. इसकी सफलता जून, 1999 में ILO कन्‍वेंशन-182 के रूप में सामने आई. जिसको सर्वसम्‍मति से अपनाने की प्रक्रिया में इसका सबसे पहले समर्थन करने वाला देश सेशेल्‍स था, जिसने सितंबर, 1999 में अपने समर्थन की पुष्टि की. अब 22 साल बाद टोंगा इसका समर्थन करने वाला 187वां सदस्य देश है.

इस कन्‍वेंशन का समर्थन करते हुए इस पर हस्ताक्षर करने वाला देश बाल श्रम को खत्‍म करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दर्शाता है. साइन करने वाला हर देश अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसके लिए बाध्य हो जाता है कि वह अपनी राष्ट्रीय नीतियों और व्‍यवहारों को कन्‍वेंशन की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाएगा. साथ ही वह इस बारे में ILO को नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट भी देगा और कन्‍वेंशन-182 के किसी भी रूप के उल्लंघन का जिम्‍मेदार माना जाएगा.

कन्‍वेंशन पारित होने के बाद से ही कैलाश सत्‍यार्थी और ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर लगातार दुनियाभर के महत्वपूर्ण नेताओं, अलग-अलग देशों की सरकारों और उनके प्रमुखों के साथ लगातार संवाद के जरिए इसका वैश्विक स्‍तर पर समर्थन करने की वकालत करते रहे हैं. सत्यार्थी कन्‍वेंशन-182 की जवाबदेही तय करने और उसके प्रभावी कार्यान्‍वयन की आवश्‍यकता पर लगातार जोर दे रहे हैं. सत्‍यार्थी के प्रयासों का ही परिणाम है कि ILO को 12 जून को ‘‘अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस’’ के रूप में मनाने की घोषणा करनी पड़ी है.

अपने जीवनकाल में ही इस बुराई का अंत देखूंगा- कैलाश सत्यार्थी

इस मौके पर सत्यार्थी ने कन्वेशन-182 पर हस्ताक्षर करने वाले सभी 187 देशों के लोगों, उनकी सरकारों और विशेषकर टोंगा और ILO को बधाई दी है. सत्यार्थी ने कहा, “आज का दिन उन लाखों बच्‍चों और कार्यकर्ताओं की जीत का दिन है, जिन्‍होंने बाल श्रम के खिलाफ 103 देशों की 80,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए ग्‍लोबल मार्च अगेंस्‍ट चाइल्‍ड लेबर का सफर पूरा किया था. इसमें कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान महामारी और उससे उपजे आर्थिक संकट से दुनियाभर में बाल श्रम में वृद्धि होगी.”

उन्होंने आगे कहा, “चुनौती बहुत बड़ी है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है. अब पूरी दुनिया को 2021 के संयुक्त राष्ट्र बाल श्रम उन्मूलन के लिए एकजुट हो जाना चाहिए. मैं उन लाखों लोगों से आह्वान करता हूं जो 22 साल पहले बाल श्रम को खत्म करने के लिए इस लड़ाई में शामिल हुए थे और आज भी वे उसी प्रतिबद्धता से इस सामाजिक बुराई के खात्में के लिए लड़ रहे हैं. अगर एकजुट होकर हम इस बुराई के खिलाफ लड़ते रहें, तो मुझे विश्‍वास है कि मैं अपने जीवनकाल में ही इसका अंत देख सकूंगा.”

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