गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव पर फंसे इमरान, चीन का भारी दबाव, देश में विरोध तेज

इमरान खान (Imran Khan) के गिलगित-बाल्टिस्तान (GB) को पाकिस्तान के पांचवें प्रांत के रूप में बदलने के फैसले को अब देश के भीतर ही चुनौती मिल रही है. उधर CPEC को लेकर चीन (China) का भी दबाव बना हुआ है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (FILE)

चीन (China) के उकसावे में आकर पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के गिलगित-बाल्टिस्तान (GB) को पाकिस्तान के पांचवें प्रांत के रूप में बदलने के फैसले को अब देश के भीतर ही चुनौती मिल रही है. इसी हफ्ते इमरान खान के उग्र प्रतिद्वंद्वी मौलाना फजलुर रहमान विपक्षी नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए, जिन्होंने बीजिंग के एजेंडे को लागू करने के लिए इमरान खान की खिलाफत की है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) चीफ मौलाना फजलुर रहमान ने जोर देते हुए कहा कि गिलगित बाल्टिस्तान इलाके को एक प्रांत बनाए जाना भारत के जम्मू कश्मीर को केंद्रीय प्रशासित क्षेत्र बनाए जाने के फैसले को मान्यता देने जैसा होगा.

मौलाना ने यह तर्क इसलिए दिया, क्योंकि पाकिस्तान शुरू से ही आजाद कश्मीर की मांग करता आया है, लेकिन अब अगर पाकिस्तान यह कदम उठा लेता है, तो उसके आजाद कश्मीर के दावे का आधार हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.

“कश्मीर का विभाजन नहीं होने देंगे”

इतना ही नहीं फायरब्रांड मौलवी ने मंगलवार को अठमुक्कम में संवाददाताओं से कहा, “कश्मीरियों के खून पर एक सौदा किया गया है. कश्मीर कूटनीति के नाम पर व्यापार किया जा रहा है.” साथ ही मौलाना ने प्रतिज्ञा की कि वो कश्मीर का विभाजन नहीं होने देंगे.

वहीं इससे पहले पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) की POK यूनिट के अध्यक्ष लतीफ अकबर ने पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में मीडिया से कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान को एक प्रांत के रूप में मानने के लिए संघीय सरकार का कदम उन्हें मंजूर नहीं था.

गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की तैयारी में पाकिस्तान, भारत ने किया विरोध

पाकिस्तान ने पारंपरिक रूप से दावा किया है कि कश्मीर के कुछ हिस्सों में अर्ध-स्वायत्त है और औपचारिक रूप से देश में इस स्थिति में नहीं है कि पूरे क्षेत्र में एक जनमत संग्रह कराया जाए.

अपने फैसले से क्यों पीछे नहीं हट सकते इमरान?

इमरान खान सरकार ने हालांकि, यह साफ कर दिया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान पर अपनी योजना को लेकर, उसका पीछे हटने का कोई इरादा नहीं और उसने 15 नवंबर को गिलगित-बाल्टिस्तान की विधान सभा के लिए चुनाव कराने की तैयारी कर ली.

भारत में पाकिस्तान पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान स्थिति में बदलाव के लिए इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा पर चीन का काफी दबाव है, ताकि इसके जरिए चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को सुरक्षित किया जा सके, जिसे बीजिंग शी जिनपिंग के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव या बीआरआई के तहत बढ़ाना चाहता है. यह एक योजना है जो चार साल से चल रही है.

2016 में ही रखी गई थी गिलगित-बाल्टिस्तान में बदलाव की नींव

दरअसल, यह 2016 में शी जिनपिंग की पाकिस्तान यात्रा के बाद से ही गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र की संवैधानिक स्थिति को बदलने की योजना की पहली रिपोर्ट सामने आई थी. समाचार एजेंसी AFP की जनवरी 2016 की एक रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से लिखा गया था, “चीन एक ऐसी सड़क पर अरबों डॉलर का निवेश नहीं कर सकता है, जो भारत और पाकिस्तान द्वारा दावा किए गए विवादित क्षेत्र से गुजरती हो.”

वहीं दिल्ली में एक विशेषज्ञ का कहना है कि इस चार पहले के बयान को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि इमरान खान के हाथ में कुछ नहीं है और उनके पास चीन के साथ जाने के अलावा और कोई रास्ता भी नहीं है.

बीजिंग ने पाकिस्तान के CPEC में जो पैसा लगाया है, उसने पहले ही शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों की क्रूरता पर बोलने के लिए पाकिस्तान का मुंह कर दिया है. भारत को उलझाए रखने के लिए भी चीन पाकिस्तान का इस्तेमाल करेगा.

जानें, इमरान खान के NSA को, जो बनाना चाहता है गिलगित बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत

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