जिनेवा में फिर पिटेगा पाकिस्तान, भारत कर रहा ये खास तैयारी

भारत के पास पाकिस्तान की तुलना में अधिक समर्थन है लेकिन यह वोटों के तौर पर दिखना चाहिए.

भारत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान के अनुरोध पर कश्मीर के मुद्दे पर हो सकने वाली बहस में अधिकतम समर्थन हासिल करने में लगा हुआ है. भारतीय प्रतिनिधिमंडल और केंद्र सरकार यूरोप, अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका से इसे लेकर कई देशों के संपर्क में हैं. 47 सदस्यीय UNHRC का सत्र सोमवार से जिनेवा में शुरू हो रहा है.

समर्थन को वोटों में तब्दील कराना चुनौती
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, UNHRC में कश्मीर के मुद्दे पर वोटिंग के दौरान भारत गैर मौजूद सदस्य देशों की संख्या को कम से कम करना चाहता है. पाकिस्तान की तुलना में भारत के पास अधिक समर्थन है लेकिन यह वोटों के तौर पर दिखना चाहिए. और यही भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है.

भारत UNHRC के यूरोपीय सदस्यों पर विशेष ध्यान दे रहा है. अफ्रीका ने इस मुद्दे पर भारत को अपना सैद्धांतिक समर्थन तो दिया है, लेकिन इसे वोटों में बदलना भारत का लक्ष्य है. बात अगर अमेरिका की करें तो उससे भी समर्थन मिलने की संभावना है. वहीं, लैटिन अमेरिकी देशों का समर्थन भी भारत को मिल सकता है.

चीन का समर्थन मिलना मुश्किल
भारत के लिए इस मुद्दे पर चीन का समर्थन हासिल करना मुश्किल लग रहा है. UNHRC में बहस का चीन पक्ष ले सकता है, लेकिन किसी विशेष प्रस्ताव पर वोट देने से उसके बचने की संभावना है. वहीं, सऊदी अरब, बहरीन और कतर के साथ भी भारत संपर्क कर रहा है. हालांकि,

UNHRC का ये सत्र 9 से 27 सितंबर तक चलेगा. पाकिस्तान इस दौरान जम्मू और कश्मीर में भारत की ओर से ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन करने’ को लेकर बहस के लिए दबाव डालेगा. ध्यान रहे कि इससे पहले पाकिस्तान इस मुद्दे को पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग में उठाने में विफल हो गया था.

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