गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की तैयारी में पाकिस्तान, भारत ने किया विरोध

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, ”पाकिस्‍तान को गिलगित-बाल्टिस्‍तान को 5वां राज्‍य बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति में बदलाव करने के किसी कदम का कोई वैध आधार नहीं है और यह शुरू से ही अवैध है.”

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 3:52 pm, Tue, 29 September 20
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File Photo- Pakistan PM Imran Khan

पाकिस्तान सरकार 15 नवंबर को गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) की विधानसभा के लिए चुनाव कराने की योजना बना रही है. भारत ने पाकिस्तान (Pakistan) सरकार के इस फैसले का  कड़ा विरोध किया है. मंगलवार को इस मामले में भारत सरकार (Government of india) के विदेश मंत्रालय ने अपना बयान जारी किया है.

बयान में कहा गया- ”हमने 15 नवंबर, 2020 को होने वाले तथाकथित ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ विधानसभा के चुनावों की घोषणा के संबंध में रिपोर्ट देखी है. पाकिस्तान सरकार के इस कदम का भारत सरकार कड़ा विरोध जताती है.”

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बयान में आगे कहा गया कि भारत इस बात को फिर से दोहराता है कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ-साथ गिलगित-बाल्टिस्तान का क्षेत्र 1947 से ही भारत का अभिन्न अंग हैं. पाकिस्तान सरकार के पास अवैध रूप से और जबरन उसके कब्जे वाले क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्‍तान को गिलगित-बाल्टिस्‍तान को 5वां राज्‍य बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति में बदलाव करने के किसी कदम का कोई वैध आधार नहीं है और यह शुरू से ही अवैध है.

ये दिखावटी चुनाव पाकिस्तान द्वारा इसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में अपनी सेना को तैनात करने के लिए है. हम पाकिस्तान से अपने अवैध कब्जे के तहत सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करने का आह्वान करते हैं.

गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत बनाने से चीन को होगा फायदा!

बता दें कि पाकिस्तान के इस कदम से चीन को फायदा मिल सकता है. जिसने इस इलाके में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं, ताकि प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच मलक्का स्ट्रेट का एक विकल्प तैयार किया जा सके.

ऐसे में गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में CPEC की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तानी सेना ने इस इलाके में अपनी मौजूदगी काफी हद तक बढ़ा दी है. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि इस क्षेत्र में CPEC योजना को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा है. लोगों का कहना है कि इसका असर पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ेगा, जबकि स्थानीय लोगों को इसका ज्यादा लाभ भी नहीं मिलेगा.

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