शांति और सुरक्षा को पर्यावरण के नुकसान से जोड़ने का कोई फायदा नहीं, संयुक्त राष्ट्र में बोला भारत

भारत (India) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि पर्यावरण (Environment) को हो रहे नुकसान के उसी प्रकार मानवीय प्रभाव हो सकते हैं, जैसे मानवीय गतिविधि के अन्य पहलुओं के आयाम हैं.

भारत (India) ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में कहा कि पर्यावरण (Environment) को हो रहे नुकसान से जुड़ी हर चीज को शांति और सुरक्षा से जोड़ना ठीक नहीं है. भारत की ओर से कहा गया कि ‘इससे जलवायु परिवर्तन संबंधी चिंताओं को दूर करने का कोई अर्थपूर्ण समाधान नहीं निकलेगा. साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित नहीं होगा कि वास्तविक अपराधी पर्यावरणीय मामलों संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेंगे.’ ‘पर्यावरणीय क्षरण के मानवीय प्रभाव और शांति व सुरक्षा’ संबंधी विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की उच्चस्तरीय खुली चर्चा के दौरान भारत ने यह बात कही.

भारत की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, “पर्यावरण को हो रहे नुकसान के उसी प्रकार मानवीय प्रभाव हो सकते हैं, जैसे मानवीय गतिविधि के अन्य पहलुओं के मानवीय आयाम हैं. हालांकि, पर्यावरणीय मामलों संबंधी हर चीज को शांति और सुरक्षा से जोड़ देने से हमें इस समस्या को लेकर समझ बढ़ाने में कोई मदद नहीं मिलेगी.”

‘समस्याओं से निपटने में कोई मदद नहीं मिलेगी’

आगे कहा गया कि ‘साथ ही ऐसा करने से हमें अर्थपूर्ण तरीके से इन समस्याओं से निपटने में कोई मदद नहीं मिलेगी. इसके अलावा इससे न ही असल में जिम्मेदार लोगों को सामने लाने व उनसे पर्यावरण संबंधी मामलों को लेकर उनकी प्रतिबद्धताओं का पालन कराने में कोई मदद मिलने वाली है.’

‘हरी-भरी रहने लायक दुनिया का निर्माण करें’

भारत ने कहा कि ‘जलवायु पर कार्रवाई को लेकर उसका अहम योगदान रहा है. देश ने वार्षिक तौर पर 38 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन पर रोक लगाई है. पिछले एक दशक के दौरान करीब 30 लाख हेक्टेयर जंगल उगाए गए. पर्यावरण की क्षति को बहुपक्षीय मुद्दों को मजबूती देने के लिए एक अवसर के तौर पर लें और हरी-भरी रहने लायक दुनिया का निर्माण करें.’

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