1947 में 23 प्रतिशत अल्पसंख्यक थे अब 3 फीसदी बचे हैं, पाकिस्तान हमें नसीहत न दे: UNGA में भारत का जवाब

चीन के विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कहा कि 'एकतरफा लिया गया कोई भी फ़ैसला यथास्थिति को नहीं बदल सकता.'
India at UNGA, 1947 में 23 प्रतिशत अल्पसंख्यक थे अब 3 फीसदी बचे हैं, पाकिस्तान हमें नसीहत न दे: UNGA में भारत का जवाब

भारत ने राइट टू रिप्लाई अधिकार का प्रयोग करते हुए पाकिस्तान के सभी आरोप का जवाब दिया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा कि इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का गलत इस्तेमाल किया है. इमरान खान का भाषण नफरत से भरा है. उनके भाषण में ‘ब्लड बाथ’ ख़ून खराबा, परमाणु बम, बंदूक जैसे शब्द का प्रयोग किया गया है. इससे पता चलता है कि पाकिस्तान अब भी मध्यकालील (बर्बरकालीन युग) युग में जी रहा है.

विदिशा मैत्रा ने आगे कहा कि ‘क्या पाकिस्तान इस बात को स्वीकार करेगा कि वो दुनिया का एकमात्र देश है जो वैसे शख़्स को पेंशन देता है जिसे संयुक्त राष्ट्र ने अल क़ायदा और ISIS जैसे आतंकियों की लिस्ट में रखा है.

वहीं कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का राग अलापने को लेकर भारत ने कहा कि एक ऐसा देश जो आतंकवाद और नफरत को मुख्यधारा में शामिल कर चुका है वो अब मानवाधिकारों का चैम्पियन बनकर अपना वाइल्डकार्ड इस्तेमाल करना चाहता है. सन 1947 में जब बंटवारा हुआ था उस समय पाकिस्तान में पश्तुन, बलोच, सिंधि, सिख, क्रिश्चियन और शिया मुसलमान जैसे 23 प्रतिशत अल्पसंख्यक थे. जो कि अब महज़ 3 प्रतिशत रह गए हैं. इसलिए वो हमे अल्पसंख्यकों का हित नहीं समझाएं.

विदिशा मैत्रा ने आगे कहा कि अब प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र ऑब्जर्वर को पाकिस्तान आने का न्यौता दिया है. जिससे कि वो बता सकें कि वहां पर कोई आतंकी संगठन सक्रिय नहीं है. विश्व समुदाय उन्हें वादे से डिगने नहीं देगी. क्या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान यह कंफर्म कर सकते हैं कि वहां पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किए गए 130 आतंकी रहते हैं. जिनमें से 25 आतंकियों की संस्थाओं को UN ने सूचीबद्ध कर रखा है.

उन्होंने आगे कहा, ‘ये वही पाकिस्तान है जिन्होंने सन 1971 में अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ भीषण नरसंहार किया था.’

इससे पहले पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक बार फिर से कश्मीर मुद्दे का राग अलापा. इतना ही नहीं उन्होंने परमाणु शक्ति देश होने की धमकी देते हुए न केवल भारत की निंदा की बल्कि कश्मीर में ‘बल्डबाथ’ यानी कि ख़ून खराबे करने की बात कही.

वहीं चीन ने भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के समझौते और द्वपक्षीय बातचीत के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए. चीन के विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कहा कि ‘एकतरफा लिया गया कोई भी फ़ैसला यथास्थिति को नहीं बदल सकता.’

इससे पहले भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान या कश्मीर मुद्दे पर बिना कुछ कहे आतंकवाद के मुद्दे को लेकर पूरे विश्व से एकजुट होने को कहा.

पीएम मोदी ने विश्व शांति के प्रति भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हमने दुनिया को ‘‘युद्ध नहीं बुद्ध’’ दिए हैं.

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को हिंदी में संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आतंक के नाम पर बंटी दुनिया उन सिद्धांतों को ठेस पहुंचाती है, जिनके आधार पर संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ. मैं समझता हूं कि आतंकवाद के खिलाफ पूरे विश्व का एकजुट होना अनिवार्य है.’’

मोदी ने आतंकवाद को लेकर कड़ा संदेश देते हुए कहा, ‘‘हमारी आवाज में आतंक के खिलाफ दुनिया को सतर्क करने की गंभीरता भी है, आक्रोश भी है. हम मानते हैं कि यह किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.’’

उल्लेखनीय है कि भारत ने 1996 में संरा महासभा में ‘‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र समझौते (सीसीआईटी)’’ को लेकर एक मसौदा दस्तावेज दिया था. किंतु यह एक मसौदा दस्तावेज ही बना हुआ है क्योंकि सदस्य देशों में इसे लेकर सहमति नहीं बन पायी है.

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