लद्दाख में भारतीय सेना के इस पराक्रम से चीनी सेना के छूट रहे पसीने, खौफ में ड्रैगन

ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि भारतीय सेना (Indian army) ने पूर्वी लद्दाख (ladakh) में वो कर दिखाया है, जो अब तक मुश्किल ही नहीं नामुमकिन माना जाता रहा है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:04 am, Fri, 18 September 20

हमने पहले भी कहा था कि भारत विपत्ति में भी अवसर देखने वाला देश है. सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने वाला देश है. LAC पर चीन ने जंग के हालात तो बनाए,लेकिन भारत ने इस विपत्ति में हिमालय पर बस्ती ही बसा ली है.हिमालय गुलजार हो उठा है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि भारतीय सेना (Indian army) ने पूर्वी लद्दाख (ladakh) में वो कर दिखाया है, जो अब तक मुश्किल ही नहीं नामुमकिन माना जाता रहा है.

दौलत बेग ओल्डी समेत लद्दाख के कई इलाकों में सेना हजारों साल पुरानी झीलों को जिंदा करने में जुटी है.सेना ने एक ऐसी उम्मीद जगा दी है जो आने वाले समय में लाखों जवानों के लिए लाइफ लाइन साबित होगी. पूर्वी लद्दाख जहां दूर-दूर तक चट्टान, ऊंचीं पहाड़ियां,सफेद रेत, कंकड़ और पत्थर है लेकिन पानी नहीं है.

अगर कहीं है भी तो बहुत कम. इतना कम जिससे सर्दियों में LAC पर मौजूद लाखों भारतीय जवानों को पीने लायक पानी आसानी से नहीं दिया जा सकता और यही भारतीय सेना के लिए बड़ी चुनौती थी.

ये उससे भी बड़ी चुनौती थी देश के वैज्ञानिक के लिए, लेकिन भारत ने इस चुनौती पर बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है.पूर्वी लद्दाख के सभी अहम क्षेत्रों में पानी की तलाश में बड़ी सफलता मिल चुकी है. पैंगोंग त्सो, थाकुंग, चुशूल, रेजांग ला और तांग्त्से में सेना पानी की तलाश में कामयाब हो चुकी है.

भारतीय सेना का 17,000 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ी रेगिस्तान में ड्रिलिंग अभियान

आगे बारी दौलत बेग ओल्डी की है, जहां भारत के फौजी 10,000 साल पुरानी पैलियो झील की काया पलटने जा रहे हैं.भारतीय सेना यहां 17,000 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ी रेगिस्तान में ड्रिलिंग अभियान मिशन मोड में चला रही है.ऐसे में विलुप्त हो चुकी झील के फिर से जिंदा होने की उम्मीद जग गई है.

यहां फौज की मदद करने के लिए वैज्ञानिकों की वही टीम है, जो सेना के साथ सियाचिन ग्लेशियर और बटालिक की चोटियों पर भी काम कर चुकी है. उम्मीद है कि ये मिशन पूरा होते ही पूर्वी लद्दाख में पानी की किल्लत हर मौसम में करीब-करीब खत्म हो जाएगी.

इतना ही नहीं सेना पूर्वी लद्दाख में पानी के हर स्रोत को जिंदा कर रही है, क्योंकि चीन की तैयारी को देखते हुए अगले 14 महीने या फिर उसके बाद भी लद्दाख से भारतीय सेना पीछे नहीं हटने वाली.इस दौरान हर दिन लाखों लीटर पानी की जरुरत होगी. इस दौरान पानी का मुख्य स्रोत 10,000 साल पुरानी झील ही बनेगी. जिसके बनने के बाद पूर्वी लद्दाख में जवानों को लेह की जगह डीबीओ के पैलियो झील से पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी.

दौलत बेग ओल्डी जिसे डीबीओ भी कहते हैं.भारत के लिए सबसे अहम रणनीतिक और सबसे महत्वपूर्ण चौकी है. दौलत बेग ओल्डी में दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी है. जो देपसांग घाटी में एलएसी के पास है. भविष्य को देखते हुए भारत लगतार रणनीतिक मोर्चेबंदी कर रहा है.

यही वजह है कि भारतीय सेना 1962 के बाद पहली बार चीन सीमा से सटी पोस्ट सर्दियों में भी खाली नहीं करेगी. सर्दियों में जब तापमान माइनस 50 डिग्री तक पहुंच जाता है.पूरे हिमालय पर बर्फबारी शुरू हो जाती है, बावजूद इसके हमारे सैनिक इन फॉरवर्ड पोस्ट पर मुस्तैद रहेंगे.

एक सैनिक पर सालभर में करीब 20 लाख रुपए खर्च

ऐसे में सेना की तैनाती महंगी भी होंगी.ज्यादा दिनों तक, ज्यादा सैनिक वहां तैनात रहेंगे तो खर्च भी ज्यादा होगा.एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 हजार से 19 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात एक सैनिक पर सालभर में करीब 20 लाख रुपए खर्च होता है.जिसमें हथियार, गोला बारूद की कीमत शामिल नहीं है.

दुनिया की कोई भी सेना इस ऊंचाई पर सैनिक तैनात करने का साहस नहीं जुटा पाती. लेकिन भारतीय सेना सियाचिन में सालों से कुदरत से लड़ते हुए ड्यूटी निभाती आई है.भारत का ये ही पराक्रम अब पूरी LAC पर फैल रहा है जिससे PLA के पसीने छूट रहे हैं और चीन की हुकूमत खौफ खा रही है.