चीन ने नहीं लिया हमारे किसी भी जवान को हिरासत में, ये सब बेकार की बातें: इंडियन आर्मी

इंडियन आर्मी (Indian Army) की तरफ से कहा गया है कि हम इस तरह की सभी खबरों को खारिज करते हैं. मीडिया समूह जब इस तरह की खबरों को चलाते हैं तो इससे राष्ट्रीय हित प्रभावित होता है. ये सब अफवाह है, वहां ऐसा कुछ नहीं हुआ.
indian soldiers detained and released by china in ladakh, चीन ने नहीं लिया हमारे किसी भी जवान को हिरासत में, ये सब बेकार की बातें: इंडियन आर्मी

भारत और चीन के बीच (China) लद्दाख में तनाव के बीच भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने आधिकारिक तौर पर उन सभी मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है जिसमें कहा गया था कि LAC पर ITBP के जवानों को चीनी सैनिकों ने हिरासत में लिया. आर्मी की तरफ से कहा गया है कि हम इस तरह की सभी खबरों को खारिज करते हैं. मीडिया समूह जब इस तरह की रिपोर्ट्स को चलाते हैं तो इससे राष्ट्रीय हित प्रभावित होता है. ये सब अफवाह है, वहां ऐसा कुछ नहीं हुआ.

इससे पहले ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि चीनी सैनिकों ने लद्दाख में 4 भारतीय सैनिकों को हिरासत में लिया और फिर बाद में उन्हें छोड़ दिया. हाल ही के सालों में चीन के सैनिकों (Chinese Troops) के बढ़ते सीमा उल्लंघन के मामलों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के बीच कई स्तर की बातचीत भी हुई है. अब भारतीय अधिकारियों ने इस मामले की पूरी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय को दी है.

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मोटर वोट से भारतीय सीमा में घुसे चीनी सैनिक

जो रिपोर्ट PMO को भेजी गई है उसमें स्पष्ट किय गया है कि चीनी सैनिकों ने न सिर्फ भारतीय सीमा में एंट्री की बल्कि वो मोटर वोट के जरिए भारतीय सीमा में गश्त भी कर रहे थे. एक अधिकारी कहते हैं कि विवाद अभी भी खत्म नहीं हुआ है, चीन ने गैल्वान के नजदीक तीन जगहों पर टेंट लगाए हैं. खबर है कि इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) नजर बनाए हुए हैं और इसकी समीक्षा की जा रही है. विवाद के बाद भारत ने भी इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया है. विदेश मंत्रालय भी कह चुका है कि चीन LAC पर भारतीय सैनिकों की पेट्रोलिंग में बाधा डाल रहा है.

भारत ने लद्दाख में बढ़ाई सतर्कता

चीनी सैनिकों की इस हरकत के बीच भारत ने Ladakh में सतर्कता बढ़ा दी है. इसी बीच भारतीय सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे (Army Chief Manoj Mukund Naravane) ने शुक्रवार को लेह में 14 कोर के मुख्यालय का दौरा किया. इससे पहले लद्दाख से जम्मू कश्मीर तक का सेना प्रमुख दौरा कर चुके हैं.

सेना प्रमुख का दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन के इस विवाद के साथ ही पाकिस्तान भी अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा है. ऐसे में सेना इस बात को लेकर चौकन्ना रहना चाहती है कि कहीं चीन के भटकाव में पाकिस्तान POK में किसी साजिश को अंजाम देने की कोशिश में तो नहीं है.

किसी क्षेत्र में चीनी घुसपैठ बर्दाश्त नहीं

भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी प्रकार की चीनी घुसपैठ की अनुमति नहीं देंगे और उन क्षेत्रों में गश्त को और भी मजबूत करेंगे. भारत और चीन के स्थानीय सैन्य कमांडरों के बीच अब तक पांच बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन लगभग 80 किमी के मोर्चे पर अभी स्थिति सुलझ नहीं सकी है.

ज्यादातर अधिकारी इस बात से सहमत हैं कि LAC पर स्थिति “अभूतपूर्व” है, जिसमें तनाव बहुत ज्यादा है. उन्होंने सुझाव दिया कि इस संकट का हल जल्द ही ढूंढना होगा क्योंकि “चीन द्वारा यथास्थिति में परिवर्तन किसी भी तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.

इन 4 प्वॉइन्ट्स पर है चीन की नजर

आपको बता दें कि लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश के बीच भारत-चीन सीमा (India-China border) 3,488 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है. आधिकारिक डेटा के मुताबिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर 2015 के बाद से लगभग 4 जगहों पर चीनी सैनिकों द्वारा 80 फीसदी सीमा उल्लंघन के मामले सामने आए हैं. इनमें से तीन जगहें तो वेस्टर्न सेक्टर में पूर्वी लद्दाख का ही हिस्सा हैं.

इस महीने की शुरुआत में पैंगोंग त्सो ( Pangong Tso) के नज़दीक भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच विवाद देखने को मिला, जहां भारत द्वारा किए जा रहे निर्माण को लेकर चीनी सैनिकों ने आपत्ति जताई थी और मामला बढ़ गया था. ट्रिग हाईट्स (Trig Heights) और बुर्त्‍स LAC के वो हिस्से हैं जहां सीमा उल्लंघन के मामले कुल मामलों का एक तिहाई हैं.

54 बार चीनी सैनिकों ने सीमा लांघी

2019 में चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा की नई जगहों में उल्लंघन करना शुरु किया. डमचल (Dumchele ) के दूसरी ओर मौजूद डोलिटांगो (Doletango) में पिछले 4 सालों में महज़ 3 बार चीन सीमा उल्लंघन के मामलों में अचानक उछाल दर्ज किया गया. इस जगह 2019 में चीनी सैनिकों ने 54 बार भारतीय सीमा लांघी.

पूर्वी सेक्टर में चीन के सबसे ज़्यादा 14.5 फीसदी सीमा उल्लंघन के मामले सामने आए, ये डिचू क्षेत्र/मदन क्षेत्र (Dichu Area/Madan) में देखने को मिले. ईस्टर्न सेक्टर के अन्य इलाकों में चीन के सीमा उल्लंघन के मामले हालांकि कम थे जिनमें सिक्किम में नाकुला (Naku La) शामिल है. यहां 2018 और 2019 में महज़ 2 बार चीनी सैनिकों ने सीमा उल्लंघन किया. इस महीने के शुरुआत में नाकुला में भी भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव देखने को मिला.

सीमा उल्लंघन में पैंगोंग त्सो सबसे टॉप पर

हालांकि इन सबमें पैंगोंग त्सो सबसे टॉप पर है. गैलवान नदी घाटी में विवाद के अलावा यहां अन्य जगहों पर बहुत ज्यादा उल्लंघन देखने को नहीं मिले. आधिकारिक आंकडों के मुताबिक पैंगोंग त्सो 135 किलोमीटर लंबी झील है जिसका एक तिहाई हिस्सा भारतीय क्षेत्र में आता है. पैंगोंग के नज़दीक एलएसी के पार पिछले पांच सालों में चीनी सीमा उल्लंघनों के मामलों की कुल संख्या 25 फीसदी दर्ज की गई, जबकि ट्रिग हाईट्स में 22 और बर्ट्स/डेपसांग बुल में 19 फीसदी चीनी सैनिकों द्वारा सीमा उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए. गैंगोंग में 2018 के पांच साल के निचले स्तर के बाद 2019 में अचानक सीमा उल्लंघन के मामले 72 से बढ़कर 142 हो गए.

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