F-16 ना गिरने के दावे पर पाकिस्तान का साथ देने को क्यों मजबूर अमेरिकी मीडिया, एक अंदरूनी पड़ताल

विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तान का एफ-16 गिराया या नहीं उस पर अब तक दोनों देशों की लड़ाई जारी है. इस बीच विदेशी संबंधों की जानकारी देनेवाली एक प्रतिष्ठित अमेरिकी वेबसाइट भी कूद पड़ी है. हम आपको बता रहे हैं कि आखिर पाकिस्तान का साथ देने के लिए अमेरिकी मीडिया क्यों मजबूर हो गया है.

बालाकोट स्ट्राइक और उसके बाद अभिनंदन वाला मामला बीते करीब डेढ़ महीने हो गए हैं लेकिन उस घटनाक्रम से उठा धुआं अभी कायम है. भारत का दावा है कि उसने पाकिस्तान का एफ-16 और 3 UAV गिराए थे जबकि खुद उसका एक मिग-21 बायसन भी गिरा, लेकिन पाकिस्तानियों की कोशिश रही है कि वो भारतीय दावे को झुठलाते रहें. पाकिस्तान ने भारत के दो विमानों को गिराने की बात कही और साथ ही एफ-16 के इस्तेमाल से मुकर गए.

दोनों देशों के अपने-अपने दावे चल ही रहे थे कि अचानक अमेरिका की फॉरेन पॉलिसी मैग्ज़ीन ने एक खुलासे का दावा ठोक दिया. उसने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पाकिस्तान को दिए गए एफ-16 विमानों की गिनती की है और वो संख्या में पूरे निकले हैं. ये लेख अमेरिकी संवाददाता लारा सैलिग्मेन ने लिखा है और इसका नाम है- Did India Shoot Down a Pakistani Jet? U.S. Count Says No. लेख में जिन दो अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का ज़िक्र है उनकी पहचान का खुलासा नहीं किया गया है.

f-16, F-16 ना गिरने के दावे पर पाकिस्तान का साथ देने को क्यों मजबूर अमेरिकी मीडिया, एक अंदरूनी पड़ताल

इस बीच ये ध्यान रखा जाना चाहिए कि अमेरिकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान को क्लीन चिट नहीं दी है लेकिन बिल्ली के भाग से छींका टूटा और पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने इस लेख को ट्वीट करने में देरी नहीं लगाई.

एक ही दिन बाद हिंदुस्तान टाइम्स ने पेंटागन के रक्षा विभाग से संपर्क करके पूछ लिया कि क्या एफ-16 विमानों की गिनती हुई है? अखबार के संवाददाता की वॉशिंगटन से छपी रिपोर्ट में जानकारी मिली कि पेंटागन ने कोई भी गिनती होने से इनकार कर दिया. उन्होंने फॉरेन पॉलिसी मैग्ज़ीन के दावों को उधेड़कर रख दिया. यहां तक कहा कि उन्हें ये भी नहीं मालूम कि अभी गिनती की प्रक्रिया शुरू हुई भी है या नहीं.

 

दरअसल यहां दो बातें समझना बेहद ज़रूरी है. पहली ये कि पाकिस्तान को सबसे आधुनिक एफ-16 विमान इसलिए बेचे गए थे ताकि वो आतंकवाद के खिलाफ उनका इस्तेमाल करे. भारत के खिलाफ उनका इस्तेमाल अमेरिका-पाकिस्तान के बीच समझौते की शर्तों का उल्लंघन है. यदि ऐसा होना मान लिया गया तो ये अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में टूट भी पैदा कर सकता है और दोनों ही देशों की सरकारों के लिए परिस्थितियां जटिल हो जाएंगी. दोनों ही पक्ष इस मुसीबत से बचना चाहेंगे.

दूसरी बात ये है कि अगर एफ-16 विमान का मिग-21 बायसन से गिराया जाना मान लिया गया तो ये अमेरिकी विमान निर्माण कंपनियों के लिए करारा झटका होगा. एफ-16 ब्रांड के लिए ये प्रतिष्ठा में  बट्टा लगने जैसी बात होती.  आखिर जिस एफ-16 को सबसे आधुनिक कहा जा रहा हो उसे रूस का पुराना मिग गिरा दे ये अमेरिका कैसे बर्दाश्त करेगा. दुनियाभर में अमेरिकी विमानों की बिक्री इससे प्रभावित होने का खतरा है. ज़ाहिर है, पाकिस्तान के लिए एफ-16 का गिरना अगर उसकी इज़्ज़त पर चोट करता है तो एफ-16 की निर्माता लॉकहीड मार्टिन के लिए ये साख का सवाल है. साल 2015 में भी अमेरिका के एफ-16 को तालिबानी रॉकेट लॉन्चर ने इतना नुकसान पहुंचा दिया था कि वो फिर उड़ने के काबिल नहीं बचा, तब खूब बवाल मचा और देखते ही देखते वो रिपोर्ट ही गायब हो गई.

 

एफ-16 की गिनती पर लेख लिखनेवाली लारा सैलिग्मेन ने इससे पहले भी कई लेख लिखे हैं. उन्होंने फॉरेन पॉलिसी मैग्ज़ीन में महीनेभर पहले एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत का मिग गिरने से अमेरिकी हथियार निर्माताओं को फायदा पहुंचेगा. सीधी बात है कि अमेरिकी मीडिया भी चाहता है कि मिग गिरें और उनकी जगह अमेरिकी फाल्कन बिकें. ऐसा चाहनेवाला भला ये क्यों चाहेगा कि फाल्कन गिरने की खबर सार्वजनिक हो जाए.

f-16, F-16 ना गिरने के दावे पर पाकिस्तान का साथ देने को क्यों मजबूर अमेरिकी मीडिया, एक अंदरूनी पड़ताल
अमेरिकी संवाददाता लारा सैलिग्मेन

लारा ने लेक्ज़िंगटन इंस्टीट्यूट के एक विश्लेषक लॉरेन थॉम्पसन का बयान भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है. थॉम्पसन ने कहा था कि, ‘जिस देश को खतरा महसूस ना हो रहा हो उसे फ्रंट लाइन फाइटर बेचना हमेशा मुश्किल है लेकिन अब बोइंग और लॉकहीड मार्टिन के लिए ये अच्छा मौका है क्योंकि भारत अचानक से डर महसूस कर रहा है.’

f-16, F-16 ना गिरने के दावे पर पाकिस्तान का साथ देने को क्यों मजबूर अमेरिकी मीडिया, एक अंदरूनी पड़ताल

निश्चित तौर पर मिग गिरने से ‘डरे भारत’ को अगर फाल्कन बेचने हैं तो अमेरिकियों को ये भी दिखाना पड़ेगा कि फाल्कन सबसे बेहतर हैं, इसीलिए बहुत मुमकिन है कि फाल्कन के निर्माताओं ने अपनी मीडिया के ज़रिए एजेंडे को आगे बढ़ाया हो जिसके लिए वो पहले से बदनाम हैं.

f-16, F-16 ना गिरने के दावे पर पाकिस्तान का साथ देने को क्यों मजबूर अमेरिकी मीडिया, एक अंदरूनी पड़ताल
फाल्कन विमान से पाकिस्तान ही नहीं अमेरिका का भी सम्मान और बिज़नेस जुड़ा है

मसलन बोइंग की बात करें तो उसके 737 मैक्स में हमेशा सॉफ्टवेयर की समस्या थी लेकिन उसे इतना प्रमोट किया गया कि वो बड़ा ब्रांड बना रहा. इंडोनेशिया में ये विमान क्रैश हो गया लेकिन कंपनी तब भी किसी ना किसी तरह उसे सबसे बेहतरीन दिखाती रही. आखिरकार इथियोपिया में 150 लोगों की मौत ने कंपनी को मानने के लिए मजबूर कर दिया कि उसके सॉफ्टवेयर में समस्या है. दुनिया के कई देशों ने बोइंग को बैन कर दिया और अब उसे ब्रांड फिर खड़ा करने में खासी मशक्कत करनी पड़ेगी.

इस स्थिति को फाल्कन के निर्माता कभी झेलना नहीं चाहेंगे इसलिए वक्त रहते सब संभाला भी जा रहा है. इन कोशिशों को एक बार फिर करारा झटका तब लगा जब भारतीय एयरफोर्स ने राडार की फोटो जारी करते हुए  मज़बूत दावा जताया  कि उनके मिग-21  ने पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराया था. अब पाकिस्तान और अमेरिकी विमान कंपनियां मिलजुल कर अपना चेहरा कैसे बचाएंगी यही देखना बाकी है.