और झुक गया चीन! पाकिस्‍तान की चाल पर यूं भारी पड़ गया मोदी का पैंतरा

बीते रविवार को पाकिस्‍तान के पीएम इमरान खान चीन दौरे पर थे. इसी दौरान ड्रैगन मसूद अजहर पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला लेने की पटकथा लिखने का काम कर रहा था.

नई दिल्‍ली: पुलवामा, पठानकोट, उरी और संसद पर आतंकी हमलों के मास्‍टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना Masood Azhar को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित कर दिया गया है. यूनाइटेड नेशन में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने बुधवार को जानकारी दी कि मसूद अजहर का नाम संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंधित सूची में जुड़ गया है. सीधे शब्‍दों में कहें तो Masood Azharअब ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित कर दिया गया है.

बीते रविवार को पाकिस्‍तान के पीएम इमरान खान चीन दौरे पर थे. इस दौरान पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई, जिसके ठीक बाद चीन का बयान आया, ‘Masood Azhar का मुद्दा सही तरीके से हल कर लिया जाएगा.’

यूनाइटेड नेशन सिक्‍योरिटी काउंसिल (UNSC) के पांच परमानेंट मेंबर्स में चीन को छोड़कर, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन,रूस  Masood Azhar को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित करने के लिए तैयार बैठे थे, लेकिन चीन बार-बार वीटो पावर का इस्‍तेमाल कर Masood Azhar को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने से रोक रहा था. पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्‍तान और चीन दोनों पर जबर्दस्‍त इंटरनेशनल प्रेशर डाला, लेकिन चीन हर बार की तरह टस से मस नहीं हुआ और उसने वही किया, जो करता आ रहा था- मतलब Masood Azhar को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट किए जाने की राह में रोड़ा अटका दिया.

चीन के लिए यह कोई नई बात नहीं थी, लेकिन इस बार UNSC में प्रस्‍ताव फ्रांस की ओर से पेश किया गया था. पुलवामा हमले के बाद भारत ने जबर्दस्‍त इंटरनेशनल प्रेशर डाला था, लेकिन चीन हल्‍के में ले गया. चीन के कदम से भारत में तो आक्रोश था ही, लेकिन अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस भी गुस्‍से से भरे थे. UNSC में वीटो पावर का बार-बार गलत इस्‍तेमाल कर रहे चीन को अन्‍य चारों परमानेंट मेबर्स ने खुली चुनौती दे डाली थी. संदेश साफ था कि अगर ड्रैगन सही रास्‍ते पर नहीं आया तो दूसरा रास्‍ता निकाला जाएगा.

दूसरी ओर पाकिस्‍तान लगातार चीन के साथ मिलकर Masood Azhar को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित किए जाने से रोक रहा था, लेकिन मामला इस बार काफी दूर तक चला गया था. दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ बन रहे माहौल को चीन और पाकिस्‍तान पहचान नहीं पा रहे थे. पाकिस्‍तान की तो अपनी मजबूरी थी, जबकि चीन की अपनी दुश्‍वारियां, लेकिन इस बार कुछ भी काम न आया.

Inside story: China Removes Objections Masood Azhar, और झुक गया चीन! पाकिस्‍तान की चाल पर यूं भारी पड़ गया मोदी का पैंतरा

सबसे नजर डालते हैं कि चीन आखिर क्‍यों मसूद अजहर पर अड़ंगा लगा रहा था?

-पाकिस्‍तान को चीन अपना ‘ऑल वेदर फ्रेंड’ बताता है. एशिया में भारत के बढ़ते प्रभुत्‍व की काट के लिए वह बरसों से पाकिस्‍तान का इस्‍तेमाल कर रहा है. तो पहला रोड़ा तो पाकिस्‍तान ही बना हुआ था.

-दूसरा कारण यह था कि दलाई लामा को भारत में बरसों से शरण मिली हुई है. दलाई लामा चीन की दुखदी रग हैं, क्‍योंकि वह भारत में रहकर तिब्‍बत की समानांतर सरकार चलाते हैं.

-ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्‍लामिक कोऑपरेशन (OIC) में पाकिस्‍तान लगातार चीन को सपोर्ट कर रहा था, लेकिन इस बार सुषमा स्‍वराज की OIC में मौजूदगी और पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री की गैरमौजूदगी ने चीन को बता दिया कि वह जिस पाकिस्‍तान पर दांव लगा रहा है, उसकी इस्‍लामिक देशों में कोई साख नहीं बची है. OIC में चीन को विरोध का सामना करना पड़ता है, क्‍योंकि वह शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों पर जुल्‍म कर रहा है.

-एक कारण यह भी है कि चीन-पाक आर्थिक गलियारा की सुरक्षा को लेकर बीजिंग डरा हुआ था. वह लगातार पाकिस्‍तान सरकार से सुरक्षा का एश्‍योरेंस मांग रहा था, जो उसे मिला नहीं. पाकिस्‍तान में मसूद अजहर के पास इतनी ताकत तो है कि वह उसके गलियारे पर हमले करा दे.

अब क्‍यों मान गया चीन

-मोदी सरकार ने अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के जरिए चीन पर जबर्दस्‍त दबाव बनाया. भारत ने बैक चैनल चीन को लगातार समझाया कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसकी नीति खतरनाक हो सकती है.

-चीन का रूस, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ अरबों डॉलर का कारोबार है. ये सभी देश उसे मसूद अजहर के मुद्दे पर आंखें दिखा चुके थे.

-चीन को भारत ने यह समझा दिया कि अगर वह भारत की दुखती रग पर संवेदनशीलता नहीं दिखाएगा तो भारत, साउथ चाइना सी से लेकर, तिब्‍बत, ताईवाल, शिनजियांग तक बगावत झेल रहे ड्रैगन के सामने चुनौती पेश कर देगा. भारत का यह आक्रामक रुख और इंटरनेशनल प्रेशर चीन नहीं झेल पाया और झुक गया या यूं कहें कि उसे झुकना ही पड़ा गया.