पहले यूएई, अब बहरीन…दो अरब देशों से इजरायल के समझौतों का दुनिया पर क्या होगा असर, जानिए

पिछले कुछ ही वक्त में इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ-साथ बहरीन संग भी राजनयिक संबंध स्थापित (Israel Bahrain UAE Peace Deal) कर लिए हैं. इससे पहले तक खाड़ी देशों में उसके मिस्र और जॉर्डन से ही संबंध ठीक थे.

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अपने हथियारों, दुश्मनों को खोज-खोजकर बदला लेने के लिए मशहूर इजरायल इन दिनों फिर चर्चा में है. लेकिन इन दिनों चर्चा उसके किसी हथियार नहीं बल्कि समझौतों की हो रही है. दरअसल, पिछले कुछ ही वक्त में इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ-साथ बहरीन संग भी राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए हैं. इससे पहले तक खाड़ी देशों में उसके मिस्र और जॉर्डन से ही संबंध ठीक थे.

बताया जा रहा है कि इस लिस्ट में अगला नाम ओमान का हो सकता है. इजरायल संग इन देशों के दोस्ताना होते रिश्तों के बाद तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं. सवाल फिलिस्तीन से जुड़ा है. सवाल है कि अमेरिका के साथ-साथ भारत पर इन संधियों का क्या असर होगा.

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सबसे पहले बात करते हैं संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और इसरायल के समझौते की. इनका पूरा क्रेडिट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिया. इजरायल और यूएई की इस दोस्ती से फिलिस्तीन खुश नहीं है. लेकिन अरब देशों से होती उसकी नजदीकी काफी अहम है क्योंकि इससे पहले दशकों तक अरब देश पूर्वी यरूशलम को लेकर इजरायल का बहिष्कार करते रहे.

मध्य-पूर्व में इजरायल के लिए खुली संभावनाएं, कुछ देश अभी खिलाफ

संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन से संबंध स्थापित होने के बाद इजरायल के लिए मध्य-पूर्व में संभावनाओं के नए रास्ते खुल गए हैं. हालांकि, ईरान और तुर्की जैसे देशों ने मध्य-पूर्व के देशों की ओर से इजरायल को मान्यता देने की इस नई शुरुआत पर अपना कड़ा ऐतराज़ जताया है और इसकी निंदा की है.

1979 में मिस्र ने किया था समझौता, छिनी थी अरब लीग की सदस्यता

1979 में मिस्र ने ही पहली बार इसराइल के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था. समझौते की सजा के रूप में अरब लीग ने मिस्र की सदस्यता भी रद्द कर दी थी. मिस्र के बाद जॉर्डन 1994 में इसराइल के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला दूसरा देश बना था.

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अमेरिकी चुनाव में भी गूंजेगा यह मुद्दा

अमेरिका की बात करें तो डोनाल्ड ट्रंप यूएई और बहरीन से इजरायल का समझौता करवाने में सबसे आगे नजर आए. अमेरिका में हाल में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. डोनाल्ड ट्रंप को खुद को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलता भी देखना चाहते हैं वह इस मुद्दे को जमकर भुनाने वाले हैं.

भारत के लिए बदलते रिश्तों के मायने

समझौता करनेवाले इजरायल और यूएई से भारत के अच्छे संबंध हैं. 2017 में इजरायल का दौरा कर पीएम मोदी वहां जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने. वहीं यूएई के पीएम मोदी तीन दौरे कर चुके हैं. दूसरी तरफ इजरायल से नजदीकी फिलिस्तीन, ईरान और तुर्की को बुरी लग सकती है. हालांकि, इसका खास असर नहीं होगा. क्योंकि ईरान वैसे भी अब चीन की तरफ ज्यादा आकर्षित है. वहीं तुर्की कश्मीर मसले पर भारत के खिलाफ बयानबाजी कर ही चुका है.

अब फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के सामने अरब देशों के नाराज होने का खतरा भी नहीं रहा है. इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) द्वारा कश्मीर मुद्दे पर विशेष बैठक की अनुमति देने से इनकार से भारत के रुख को व्यापक मान्यता मिलने का संकेत भी मिलता है.

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