चाइना में चली ‘प्यार वाली रेलगाड़ी’, दो दिन-एक रात के सफर में चुनिए अपना हमसफर

चीन में 1,000 से ज्यादा युवा पुरुषों और महिलाओं ने एक साथ इस महीने की शुरुआत में एक खास तरह की ट्रेन से यात्रा की. उनकी इस ट्रेन का मकसद पर्फेक्ट लाइफ पार्टनर तलाशना है.

नई दिल्ली: जिंदगी का सफर सुनहरा हो इसके लिए जरुरी होता है कि आपका हमसफर भी सुनहरा हो…पहले के दौर में आपका हमसफर चुनने की जिम्मेदारी आपके घरवालों की होती थी लेकिन वक्त के दरमियां बदलाव आया और अब लड़का और लड़की खुद ही अपना हमसफर चुन रहे हैं लेकिन चाइना में तो इसके लिए एक स्पेशल ट्रेन ही चला दी गई. जिसमें आप अपना पसंदीदा हमसफर चुन सकते हैं और अगर हमसफर नहीं भी चुन पाए तो आपको एक अच्छा दोस्त जरूर मिल जाएगा.

चीन में 1,000 से ज्यादा युवा पुरुषों और महिलाओं ने एक साथ इस महीने की शुरुआत में एक खास तरह की ट्रेन से यात्रा की. उनकी इस ट्रेन का मकसद पर्फेक्ट लाइफ पार्टनर तलाशना है. 1970 के दशक के दौरान अपनाई गई ‘एक बच्चे की नीति’ की वजह से चीन में विशाल लिंग अंतर की स्थिति बन गई है. इस अंतर की वजह से वहां लोगों को अच्छे जीवनसाथी ढूंढने में दिक्कत हो रही है.

दो दिन और एक रात
एशिया वन के मुताबिक, चोंगकिंग नॉर्थ स्टेशन से कियानजियांग स्टेशन तक की दो दिन और एक रात की ये यात्रा 10 अगस्त को शुरू हुई थी. डेली मेल यूके की रिपोर्ट में बताया गया है कि 10 डब्बों वाली ‘लव-परस्यूट ट्रेन’ को तीन साल पहले देश के 200 मिलियन सिंगल लोगों के लिए रोस्टिंग मैच-मेकिंग सेवा के तौर पर लॉन्च किया गया था. तब से इस ट्रेन में 3,000 से अधिक युवाओं ने यात्रा की है और एक-दूसरे से मिलने के बाद 10 से ज्यादा जोड़ों ने शादी की है. इस तरह की गतिविधियां बाकी तरीकों से ज्यादा रचनात्मक हैं. ट्रेन एक मैगपाई पुल की तरह है, जो यात्रा के दौरान एक-दूसरे को जानने के लिए अलग-अलग जगहों के लोगों को एक साथ लाती है.

खास ट्रेन का खास एहसास
इस खास ट्रेन का हिस्सा बने हुआंग सांग नाम के शख्स ने बताया, ‘भले ही आप अपने लिए सही जोड़ीदार नहीं खोज पाएं, फिर भी आप ट्रेन में बहुत सारे अच्छे दोस्त बना सकते हैं.’ कई तरह के खेल और भोजन विकल्पों के अलावा यात्रियों के पास पारंपरिक प्रदर्शनों को देखने और 1,000 लोगों के साथ भोज का आनंद लेने के लिए प्राचीन ‘पानी के शहर’ झूओ शुई में भी रुकने का अवसर होता है.

‘लव-परस्यूट ट्रेन’
यांग हुआन ने कहा कि वह पहले से ही ‘लव-परस्यूट ट्रेन’ की यात्रा के दौरान खुद को एक अच्छा प्रेमी पाया. उन्होंने समाचार वेबसाइट यूथ.एनएन को बताया, “हमें केवल वापसी यात्रा पर एक-दूसरे का पता चला और हमें मेल खाने वाले मूल्यों का एहसास हुआ.” उन्होंने कहा, “हमें एहसास हुआ कि हम दोनों उस तरह का प्यार चाहते थे, जिस तरह ‘टू द ओक ट्री’ कविता में दर्शाया गया है. जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की तारीफें करते हैं और आजाद रहते हैं. हमें साथ में रहना अच्छा लगता था.’

एक बच्चे वाली नीति को 2016 में खत्म कर दिया
30 मिलियन चीनी पुरुषों को एक बच्चे की नीति की वजह से आने वाले 30 सालों में बिना पत्नी की स्थिति में पहुंच जाएंगे. एक बच्चे वाली नीति को 2016 में खत्म कर दिया गया था. इस नीति की वजह से कई जोड़ों ने लड़का पैदा करने के लिए अजन्मी लड़कियों को गर्भ में ही मार देने का फैसला लिया, जिस वजह से ये जेंडर असंतुलन कायम हुआ. 2018 में देश में हर 1,000 में से केवल 7.2 लोगों को शादी करने का अवसर मिला. इन आंकड़ों की वजह से चीन में शादी की दर पिछले एक दशक में सबसे कम रही.

चेयरमैन माओ ने अपनाई थी ये नीति
1970 के दशक के उत्तरार्ध में अनिवार्य एक बच्चे की नीति को लॉन्च किया गया था, जो चेयरमैन माओ द्वारा गृह युद्ध के बाद तेजी से बढ़ रही आबादी को रोकने के लिए उठाया गया कदम था. ये नियम 20 वीं सदी के अंत तक चीनी आबादी को 1.2 बिलियन से कम रखने के उद्देश्य से लागू किया गया था.