जानें, इमरान खान के NSA को, जो बनाना चाहता है गिलगित बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत

गिलगित-बाल्टिस्तान की विवादित स्थिति को बदलने का प्रयास मोईद यूसुफ की उस योजना में भी फिट बैठता है, जिसकी वो लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं और जिसके तहत भारत के साथ वो नियंत्रण रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा में बदलना चाहते हैं.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 7:41 pm, Wed, 23 September 20
मोईद यूसुफ

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने पाकिस्तान के कब्जे वाले उत्तरी क्षेत्रों में विवादित गिलगित-बाल्टिस्तान को एक प्रांत बनाने की पाकिस्तान की कवायद के सार्वजनिक होने से पहले पिछले सप्ताह देश के नेताओं मुलाकात की थी. हालांकि इस मामले से परिचित लोगों का कहना है कि जनरल बाजवा अकेले नहीं हैं जो पांचवां प्रांत बनाने को लेकर काम कर रहे हैं. इसको लेकर एक 39 वर्षीय शख्स मोईद यूसुफ भी उतनी ही मेहनत कर रहा है.

युसुफ, राष्ट्रीय सुरक्षा डिविजन और रणनीतिक योजना पर पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान के विशेष सहायक हैं. वो इस्लामाबाद के गिलगित-बाल्टिस्तान को दी गई संवैधानिक स्वायत्तता को रद्द करने और पाकिस्तान के पांच प्रांतों में से एक के रूप में विवादित क्षेत्र को शामिल करने के फैसले में एक प्रमुख रोल अदा कर रहे हैं. नई दिल्ली में पाकिस्तान पर नजर रखने वालों ने पाकिस्तान के युवा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को इस परियोजना के प्रमुख सदस्यों में से एक बताया है.

गिलगित बाल्टिस्तान को प्रांत बनाने से चीन को होगा फायदा!

पाकिस्तान में गिलगित-बाल्टिस्तान का मिलाया जाना चीन के लिए काफी काम आ सकता है. जिसने इस इलाके में चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं, ताकि प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच मलक्का स्ट्रेट का एक विकल्प तैयार किया जा सके.

ऐसे में गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में CPEC की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तानी सेना ने इस इलाके में अपनी मौजूदगी काफी हद तक बढ़ा दी है. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि इस क्षेत्र में CPEC योजना को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा है. लोगों का कहना है कि इसका असर पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ेगा, जबकि स्थानीय लोगों को इसका ज्यादा लाभ भी नहीं मिलेगा.

LoC को अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर में बदलना चाहते हैं मोईद

गिलगित-बाल्टिस्तान की विवादित स्थिति को बदलने का प्रयास मोईद यूसुफ की उस योजना में भी फिट बैठता है, जिसकी वो लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं और जिसके तहत भारत के साथ वो नियंत्रण रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा में बदलना चाहते हैं. 2009 में भी मोईद यूसुफ ने LoC को IB में बदलने की वकालत की थी, जिसके तहत उनका कहना था कि दोनों पक्ष जम्मू कश्मीर से संबंधित अपने-अपने हिस्सों पर संप्रभु नियंत्रण रखें.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और NSA मोईद यूसुफ

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और NSA मोईद यूसुफ

 

पाकिस्तानी मामलों के एक जानकार का कहना है कि मोईद यूसुफ ने लगभग एक दशक बाद साल 2018 में अपने नई दिल्ली दौरे के दौरान भी दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा को औपचारिक सीमा का रूप देने की संभावनानों को तलाशने का भी प्रयास किया. हालांकि तब तक उन्होंने यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के जरिए वॉशिंगटन में खुद को उलझा लिया और पाकिस्तानी सेना और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के साथ मिलकर काम किया.

कश्मीर मुद्दे के समाधान के पैरोकार की छवि

यूसुफ ने USIP में भारत-पाक शांति और कश्मीर मुद्दे के समाधान के पैरोकार होने की छवि पेश की थी. हालांकि दिसंबर 2019 में इमरान खान द्वारा विशेष सलाहकार के रूप में चुने जाने से पहले वो USIP में एक विवाद का भी हिस्सा बने थे. जब जनता के पैसे से चलने वाले इस संस्थान पर आरोप लगा कि वो चुनिंदा पाकिस्तानी अधिकारियों की मेजबानी का विकल्प बनकर रह गया है.

दक्षिण एशिया के एक विशेषज्ञ ने युसुफ पर ये आरोप भी लगाया था कि उन्होंने USIP के भीतर अपनी स्थिति और पहुंच का उपयोग कर पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की थी. कहा जाता है कि इमरान खान की टीम में शामिल होने और जनरल बाजवा और अन्य शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ काम करने के बाद भी यूसुफ ने भारत-पाक संबंधों पर अपने विचारों के बारे में बोलना जारी रखा.

इमरान खान की टीम में उनकी नई भूमिका में, अमेरिकी सिस्टम में उनकी समझ और परिचितता ने उन्हें पाकिस्तानी नेतृत्व के लिए मुख्य रणनीतिक विचारक के रूप में स्थान दिलाने में मदद की है. खासतौर से अमेरिकी प्रशासन, कांग्रेस, नौकरशाही और थिंक-टैंक से निपटने के लिए.

भारत में पाक पोषित आतंकवाद पर मोईद के विचार

हालांकि कश्मीर को हासिल करने के लिए पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के समर्थन पर उनके विचारों के बारे में ज्यादा कुछ सार्वजनिक नहीं है. भारतीय आतंकवाद रोधी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने कभी भी ऐसा नहीं सुना है जहां मोईद यूसुफ ने भारत में सक्रिय आतंकवादियों को समर्थन देने वाले समूहों को खत्म करने की बात कही हो.

एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “हमें जितना पता है उसके मुताबिक वो इस विचार के समर्थन में हैं कि पाकिस्तान को कश्मीर पर मध्यस्थता की मांग नहीं करनी चाहिए क्योकि अगर अमेरिका एकतरफा प्रस्ताव के साथ आता है तो इस्लामाबाद एक अजीब स्थिति में आ सकता है.”