गांव ऐसा कि हिंदुस्तान के शहर भी शरमा जाएं, ये है अमेरिकी किसानों की सक्सेस स्टोरी

अमेरिका अपने पसीना बहाने वाले किसानों की मेहनत का सम्मान करता है. अन्न देने वालों का ख्याल रखता है और जिसका नतीजा ये होता है कि अमेरिका में किसी भी एग्री प्रोडक्ट का 64 से 81 रुपये सीधा किसान की जेब में जाता है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:30 am, Thu, 1 October 20

किसानों के कानून को लेकर देश में घमासान मचा है. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का विरोध हो रहा है. लेकिन TV9 आपको अमेरिके के कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की तस्वीर दिखा रहा है. जिसे देखकर दुनिया भर के किसान जलन कर सकते हैं. क्योंकि यहां पर नौकरीपेशा लोगों से ज्यादा किसान ही कमाते हैं और इसमें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की बड़ी भूमिका है.

अमेरिका में खेत ऐसे कि लहलहाती फसल को देखकर दिल खुश हो जाए. और गांव ऐसे कि यहां की सुख सुविधाएं देखकर हिंदुस्तान के तमाम शहर शरमा जाएं. दुनिया के सुपरपावर देश अमेरिका के खेत खलिहानों से दौलत बरसती है और गांवों में एक मजबूर नहीं बल्कि मजबूत किसान का परिवार बसता है.

अमेरिका में सिर्फ 23 लाख किसान हैं. जिनके पास औसतन 250 हेक्टेयर जमीन है. किसानों का परिवार अमूमन पढ़ा लिखा होता है और खेती किसानी के ताजा शोधों का अपने फार्म में प्रयोग करता रहता है. लेकिन एक अमेरिकी किसान के अमीर होने की सिर्फ ये ही वजह नहीं हो सकती. बल्कि इसकी वजह है खेती से होने वाला मुनाफा.

अमेरिका अपने पसीना बहाने वाले किसानों की मेहनत का सम्मान करता है. अन्न देने वालों का ख्याल रखता है और जिसका नतीजा ये होता है कि अमेरिका में किसी भी एग्री प्रोडक्ट का 64 से 81 रुपये सीधा किसान की जेब में जाता है. और 19 से 36 रुपये की लागत लगाकर ये 100 रुपये की कीमत में कंज्यूमर तक पहुंच जाता है.

उसी से किसान का गांव चमक जाता है पूरा परिवार अच्छी जिंदगी बसर करने के काबिल हो पाता है. अपना अमेरिका नाम से एक इंडियन ने ये वीडियो सोशल मीडिया पर डाला. इसे देखकर हिंदुस्तान को अपने गांवों को तौलना चाहिए. ये एक गांव पूरे अमेरिका का पैमाना नहीं हो सकता.

लेकिन यूट्यूबर ने इसे अमेरिका का एक औसत गांव बताया है. लेकिन औसत गांव भी ऐसा है कि हिंदुस्तान के कई शहर शरमा जाएं. हिंदुस्तान के किसान ने सपनों में भी प्ले ग्राउंड का ख्वाब नहीं देखा होगा लेकिन एक विकसित देश में किसान इसके बारे में सोच सकता है.

इस किसानी को अमेरिका के मैरिलैंड के टेड और जुलिया की कहानी से समझिए. दोनों के दिमाग में एक दिन शहर छोड़कर खेती करने का ख्याल आया और दोनों मैरीलैंड में अपने पुराने बंद पड़े फार्म आ पहुंचे. अच्छी पढ़ाई ने टेड और जूलिया को नए तरीके से खेती करने की तरकीब बताई तो इंटरनेट ने गांव में ही बाजार को पहुंचा दिया.

अब आप इसे अमेरिकी किसानों की किस्मत कहिए या हिंदुस्तान के किसान की बदकिस्मती लेकिन हकीकत ये है कि अगर हिदुस्तान के किसान की तकदीर बदली तो हिंदुस्तान के गांव भी संवरेंगे. 58 परसेंट किसान परिवारों की जिंदगी भी सुधरेगी. लेकिन इन सबसे ऊपर भ्रष्टाचार का वो दीमक मिटेगा जिसे जिंदा रखने के हर हथकंडे अपनाए जाते हैं.

कोरोना के बावजूद बढ़ेगी इनकम

अमेरिका में उम्मीद जताई जा रही है कि कोरोना के बावजूद 2020 में वहां के किसानों की इनकम और बढ़ेगी. USDA की रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 में किसानों की आय 14.7 परसेंट बढ़ी थी. लेकिन 2019-2020 में किसानों की आय 7.9 परसेंट बढ़ने का अनुमान है. जिसके बाद एक किसान एक साल में औसतन 65 लाख रुपये की कमाई करेगा. जो दुनिया के बाकी देश सोच भी नहीं सकते.

खासकर हिंदुस्तान में तो सदियों से किसान के साथ साथ कंज्यूमर भी लुटते रहे हैं और इस लूटखसोट को बंद करने की कोई गंभीर नीति नहीं बनी. हो सकता है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के कानून से नुकसान हो. लेकिन सवाल ये है कि जब सूई से लेकर हवाई जहाज तक बनाने वाली कंपनियां अपनी लागत और मुनाफे का हिसाब लगाती हैं तो किसान अपने मुनाफे का हिसाब क्यों नहीं लगा सकता.

जब एक कंज्यूमर किसी भी दुकान से सामान खरीद सकता है तो एक किसान किसी भी मंडी में सामान क्यों नहीं बेच सकता या फिर किसी कंपनी को अपना सामान क्यों नहीं बेच सकता. अब वक्त है विरोध से आगे बढ़ने का और ये बताने का कि किसान और कंज्यूमर को बिचौलियों के दुष्चक्र से निकालने का तरीका क्या है. अगर किसी को APMC मंडी या फिर MSP को बरकरार रखना ही सारी समस्या का हल नजर आता है. तो ये हल हर तरह से गलत है.