मिलिट्री कोर्ट से सिविल कोर्ट में पहुंचा कुलभूषण का मामला, जानिए क्या हैं इसके मायने

भारतीय नौसेना के अधिकारी रहे कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी.

Kulbhushan Jadhav Case: पाकिस्‍तान की इमरान खान सरकार आर्मी एक्‍ट में बदलाव करने जा रही है. तभी कुलभूषण जाधव अपनी सजा के खिलाफ सिविल कोर्ट में अपील दायर कर पाएंगे. पाकिस्‍तान की एक मिलिट्री कोर्ट ने जाधव को जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई है.

Kulbhushan Jadhav Case: भारत के पक्ष में हैं ये बातें

  • मिलिट्री कोर्ट के फैसले के बाद सिर्फ आर्मी चीफ के सामने अपील की जा सकती है. अब आर्मी चीफ के रहम-ओ-करम पर रहने की जरूरत नहीं.
  • कुलभूषण जाधव को अपना वकील रखने का अधिकार होगा.
  • पाकिस्तान सरकार को कोर्ट के सामने कुलभूषण के मामले में आरोपों को लेकर सबूत पेश करना होगा.
  • कुलभूषण जाधव अपने वकील के जरिये पाकिस्तान के झूठे सबूतों पर कोर्ट में सवाल कर सकेंगे.
  • अदालती प्रक्रिया पर दुनिया भर की नज़र होगी.
  • कुलभूषण जाधव को अपनी बात कहने का अधिकार होगा.
  • इस मामले का सच सामने आ सकेगा.
  • भारतीय राजनयिक कुलभूषण की कानूनी मदद कर पाएंगे.

भारतीय नौसेना के अधिकारी रहे जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी. भारत ने उनकी फांसी पर रोक लगाने के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) का दरवाजा खटखटाया था.

ICJ के अध्यक्ष न्यायाधीश अब्दुलकावी ए.यूसुफ ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्‍तान को लताड़ा था. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुंच की न देकर वियना संधि तोड़ी. अपने आदेश में भी ICJ ने पाया कि राजनयिक पहुंच के अधिकार का उल्लंघन हुआ है.

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