मस्जिद के अंदर खड़े बंदूकधारी आतंकी के पीछे वो रेंगते हुए पहुंचा, फिर…..

‘हमलोग एक छोटे से लगभग 100 स्क्वेयर मीटर की मस्जिद में थे. इतने में कुछ बंदूकधारी अंदर घुसते हुए दिखे जो फायरिंग कर रहे थे. मेरी धड़कनें तेज़ हो गई, मैं कुछ महसूस नहीं कर पा रहा था’

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 10:50 am, Sat, 16 March 19

नई दिल्ली: न्यूज़ीलैंड मस्जिद हमले में दहशत के वो 17 मिनट की कहानी जो आप सब के दिलों में ख़ौफ़ पैदा करती है आप सबने सुन ली लेकिन इस आतंकी घटना के दौरान कुछ ऐसा भी हुआ जो इस मुश्किल घड़ी में आपको हौसला बनाए रखने की प्रेरणा दे सकता है.

सोचिए आपके सामने कुछ अपराधी हाथों में बंदूक लहरा रहें हों, फ़ायरिंग कर रहे हों तो आप क्या करेंगे. निश्चय ही आपका कलेजा मुंह में आ जाएगा. पिछले दस सालों से न्यूज़ीलैंड में रह रहे भारतीय नागरिक फ़ैज़ल सैय्यद के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. हालांकि इस मुश्किल घड़ी में फ़ैज़ल ने अदम्य साहस का जो अद्भुत नज़ारा देखा वो उनकी ज़ेहन में भरे आतंक की छवि पर भी भारी पड़ गया.

फ़ैज़ल ने एनडीटीवी से अपनी आपबीती सुनाते हुए अज्ञात वीर को इस तरह याद किया, ‘हमलोग एक छोटे से लगभग 100 स्क्वेयर मीटर की मस्जिद में थे. इतने में कुछ बंदूकधारी अंदर घुसते हुए दिखे जो फायरिंग कर रहे थे. मेरी धड़कनें तेज़ हो गई, मैं कुछ महसूस नहीं कर पा रहा था लेकिन मैने और मेरे दोस्त ने एक सज्जन को देखा जो ज़मीन पर रेंगते हुए गनमैन की तरफ़ बढ़ा और उसे तब तक पकड़े रहा जब तक उसकी बंदूक नीचे नहीं गिर गया.’

फ़ैज़ल ने कहा, ‘अगर उस अज्ञात व्यक्ति ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बंदूकधारी को नहीं पकड़ा होता तो कई और लोगों की जान जा सकती थी. उसकी हिम्मत की वजह से वो दरवाजे की तरफ भागने को मजबूर हो गया.’

इस घटना में बाल-बाल बचे फ़ैज़ल को अपने दोस्त को खोने का दुख तो है लेकिन न्यूज़ीलैंड या यहां रह रहे लोगों के ख़िलाफ़ कोई दुर्भावना नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं किसी और के बारे में कुछ नहीं कह सकता लेकिन इस सुंदर न्यूज़ीलैंड में पिछले 10 सालों से रह रहा हूं और मैने आज तक यहां कुछ भी बुरा नहीं देखा. इसलिए सिर्फ एक घटना की वजह से कोई राय बनाऊं, मैं उन लोगों में से नहीं हूं.’

फ़ैज़ल सैय्यद मुंबई से 10 साल पहले न्यूज़ीलैंड आए थे और आज भी उनका देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मुझे न्यूज़ीलैंड और यहां के लोगों से बेहद प्यार है. मेरा हाल-चाल जानने के लिए अब तक जितने कीवी दोस्तों के फोन आए उतना किसी का नहीं आया है. हालांकि 10 साल पहले मैं जिन लोगों के साथ काम कर रहा था उन्होंने भी मैसेज कर मुझसे मेरी खैरियत पूछी है.’

सैय्यद ने कहा, ‘अब बस लोगों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि इस तरह की आतंकी वारदात दोबारा नहीं होगी. वहां काफी लोगों की जान गई है, कई लोग इस घटना के बाद लोगों को जज करने लगे हैं जो ठीक नहीं है. लोगों तक सही संदेश पहुंचाना बेहद ज़रूरी है.

बता दें कि इस मस्जिद में हुई गोलीबारी में सैय्यद के एक दोस्त की जान चली गई जबकि एक अन्य अस्पताल में भर्ती है. यहां 8 लोगों की मौत हुई है.