अफगानिस्तान पहुंचे लश्कर-जैश के 1000 से ज्यादा आतंकी, बड़ी नापाक साजिश में जुटा पाकिस्तान

युद्धग्रस्त देश अफगानिस्तान (Afghanistan) में दोनों आतंकी संगठनों के करीब 1000 आतंकवादियों के होने का अनुमान है, जिनमें से अधिकांश तालिबान और अमेरिका के बीच फरवरी के समझौते के बाद यहां दाखिल हुए हैं.
More than one thousand terrorists of Lashkar Jaish, अफगानिस्तान पहुंचे लश्कर-जैश के 1000 से ज्यादा आतंकी, बड़ी नापाक साजिश में जुटा पाकिस्तान

जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में आतंक फैलान वाले पाकिस्तान (Pakistan) के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ISI के निर्देश पर अफगानिस्तान (Afghanistan) में कट्टरपंथियों को प्रशिक्षित करने और लड़ने के लिए तेजी से ऑपरेशन चला रहे हैं.

एक हजार से ज्यादा आतंकी पहुंचे अफगानिस्तान

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट मुताबिक, युद्धग्रस्त देश में दोनों आतंकी संगठनों के करीब 1,000 आतंकवादियों के होने का अनुमान है, जिनमें से अधिकांश तालिबान और अमेरिका के बीच फरवरी के समझौते के बाद यहां दाखिल हुए हैं.

कब-कब कितने आतंकियों ने की घुसपैठ?

पिछले कुछ महीनों में, लश्कर के लगभग 200 लोगों ने पाकिस्तान की बाजौर एजेंसी से अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में घुसपैठ की थी. इसके अलावा मई के आखिरी हफ्ते में लश्कर-ए-तैय्यबा के 30 आतंकवादियों के एक दूसरे ग्रुप ने ISI के पूर्व अधिकारी बिलाल उर्फ ​​जरकावी के नेतृत्व में कुंअर के डांगम जिले में घुसपैठ की थी.

वहीं करीब दो हफ्ते पहले तालिबान के कमांडर मुल्ला नेक मोहम्मद राभर के तैयार किए गए जैश के 45 आतंकियों ने पाकिस्तान में कुर्रम एजेंसी के जरिए से नंगरहार के शेरज़ाद प्रांत में प्रवेश किया था. दिल्ली और काबुल में आतंकवाद-रोधी अधिकारियों ने कहा कि इन दो आतंकवादी समूहों द्वारा अफगानिस्तान पर ध्यान देना यह बताता है कि उनकी तैनाती और कार्रवाई के पीछे पाकिस्तान की ISI का हाथ है.

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आतंकी गतिविधि जारी रखने के लिए ऐसा कर रहा पाकिस्तान

अब एक अधिकारी ने कहा कि तालिबान-अमेरिका की शांति प्रक्रिया के राजनीतिक गतिरोध की स्थिति में पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को जारी रखने के लिए जमीन तैयार करने के लिए ऐसा कर रहा है. अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा रणनीति के तौर पर आतंकी समूहों का इस्तेमाल करने की कोशिश की है.

मालूम हो कि ISI का पूर्व अधिकारी बिलाल उर्फ ​​जरकवी, जिसने लश्कर के 30 आतंकवादियों की टीम का नेतृत्व कर, उसे अफगानिस्तान में दाखिल कराया थे, वो पहले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) की राजधानी मुजफ्फराबाद में एक बड़े आतंकी प्रशिक्षण केंद्र का प्रभारी था.

कई लोकल ग्रुप की मदद से चल रहा मिशन

अधिकारियों ने आगे बताया कि इसकी सबूत मिले हैं कि लश्कर के संचालक, जमात-अल-दावा और जैश-ए-सलाफी जैसे संगठनों की मदद से अफगानिस्तान में अपने मिशन को अंजाम दे रहे हैं. अफगानिस्तान में दो आतंकवादी समूहों की मौजूदगी और गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. एक अधिकारी ने कहा, “लेकिन हम मुख्य भूमिका निभाने वालों में से कुछ की पहचान करने में सक्षम हैं.”

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